बिलासपुर-रायगढ़ रेल खंड पर सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। अकलतरा स्टेशन पर यार्ड रिमॉडलिंग और चौथी लाइन कनेक्टिविटी के कार्य को रिसेड्यूल किए जाने के कारण रेलवे ने 18 अप्रैल तक कई लोकल ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इस फैसले का सीधा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब गंतव्य तक पहुंचने के लिए मशक्कत और आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है।
रेलवे प्रशासन के अनुसार, अधोसंरचना विकास के इस कार्य के चलते बिलासपुर-रायगढ़-बिला सपुर मेमू पैसेंजर को 18 अप्रैल तक पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। गाड़ी संख्या 68861 गोंदिया-झारसुगुड़ा पैसेंजर अब केवल बिलासपुर तक ही चलेगी। बिलासपुर से झारसुगुड़ा के बीच यह ट्रेन रद्द रहेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 68862 झारसुगुड़ा से न चलकर बिलासपुर से ही प्रारंभ होगी। लोकल ट्रेनों के बंद होने से बड़े स्टेशनों के बीच तो एक्सप्रेस गाड़ियां विकल्प बन रही हैं, लेकिन किरोड़ीमल, भूपदेवपुर, झाराडीह, खरसिया, सक्ती, जेठा, बाराद्वार और अकलतरा जैसे छोटे स्टेशनों के यात्रियों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। दैनिक मजदूर, छोटे व्यापारी और कर्मचारी जो इन स्टेशनों से रोजाना सफर करते थे, उनके लिए आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। पहले इस रूट पर इतवारी-टाटा जैसी ट्रेनें पैसेंजर के रूप में उपलब्ध थीं, लेकिन उन्हें एक्सप्रेस बना देने से अब गिनती की ही गाड़ियां बची थीं, जिन्हें भी अब रद्द कर दिया गया है। लोकल ट्रेनें रद्द होने का दबाव अब एक्सप्रेस ट्रेनों पर साफ देखा जा सकता है। रायगढ़ और बिलासपुर स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों के पहुंचते ही जनरल कोच में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बन रही है।
सड़क मार्ग पर निर्भरता से सफर हुआ महंगा, परेशानी ट्रेनों के अभाव में यात्रियों को सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है, जो काफी महंगा साबित हो रहा है। यात्री मजबूरी में ऑटो बुक कर रहे हैं। रायगढ़ से भूपदेवपुर जैसे छोटे स्टेशन तक जाने के लिए यात्रियों से 400 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। इस रूट पर बसों की संख्या महज 4 से 5 है, जो यात्रियों के भारी दबाव को झेलने में सक्षम नहीं हैं। जांजगीर तक जो सफर मेमू में 10 रुपए में होता था, अब एक्सप्रेस में उसी दूरी के लिए यात्रियों को 30 रुपए से अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।















