छत्तीसगढ़ में डिजिटल-फर्स्ट जनगणना 2027 के लिए चलाए जा रहे अभियान ने अब गति पकड़ ली है. राज्य के 61,000 से अधिक निवासियों ने अब तक स्व-गणना (self-enumeration) पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा लिया है, जो जनसांख्यिकीय डेटा जुटाने की पद्धति में एक बड़े बदलाव का संकेत है.
जनगणना संचालन निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, कुल 61,503 नागरिक ऑनलाइन प्रक्रिया में शामिल हुए हैं, जिनमें से 47,419 लोग अपने परिवार का विवरण सफलतापूर्वक जमा कर चुके हैं, जबकि 14,084 लोग वर्तमान में डेटा प्रविष्टि की प्रक्रिया में हैं.
भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त के मार्गदर्शन में संचालित यह अभियान निवासियों को ओटीपी-आधारित सुरक्षित पोर्टल के माध्यम से आवास, परिवार की संरचना और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी सीधे साझा करने की सुविधा देता है.
सफलतापूर्वक विवरण जमा करने के बाद, उपयोगकर्ताओं को एक ‘जनगणना संदर्भ संख्या’ (CRN) प्रदान की जाती है, जो भविष्य के सत्यापन के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड के रूप में काम आती है.
अधिकारियों का मानना है कि इस डिजिटल दृष्टिकोण से न केवल डेटा की सटीकता में सुधार होगा, बल्कि गणना के दौरान होने वाली मानवीय त्रुटियों में भी कमी आएगी, जिससे क्षेत्रीय प्रगणकों का बोझ कम होगा.
प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए डिजिटल उपकरणों से लैस प्रशिक्षित सुपरवाइजरों को तैनात किया गया है, जो डेटा प्रविष्टि और सत्यापन में नागरिकों की सहायता कर रहे हैं. साथ ही, तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन भी स्थापित की गई हैं.
छत्तीसगढ़ के जनगणना संचालन निदेशक कार्तिकेय गोयल ने नागरिकों से इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का आग्रह करते हुए कहा कि कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर नियोजन और वितरण के लिए एक सटीक डेटाबेस अनिवार्य है. उन्होंने स्पष्ट किया कि एकत्रित किया गया डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए कानूनी सुरक्षा के तहत किया जाएगा.















