पश्चिम एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां, कंपनियों के वित्तीय नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें शेयर बाजार की दिशा तय करेंगी। इस हफ्ते शुक्रवार को ‘महाराष्ट्र दिवस’ के अवसर पर घरेलू शेयर बाजार बंद रहेंगे। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा, “आगे बाजार काफी हद तक खबरों पर आधारित और उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली बातचीत, कच्चे तेल की कीमतों के रुझान और वैश्विक संकेतकों पर रहेगी। अगर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट आती है तो इससे आर्थिक चिंताओं में कमी आ सकती है, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने या लंबे समय तक व्यवधान रहने से बाजार में फिर से अस्थिरता और मुनाफावसूली देखी जा सकती है।”
चौथी तिमाही के नतीजों पर रहेगी निवेशकों की नजर
पोनमुडी आर. ने कहा कि चौथी तिमाही के नतीजे भी शेयर-विशिष्ट गतिविधियों के लिए प्रमुख कारक होंगे, जहां निवेशक कंपनियों के प्रदर्शन, भविष्य के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के परिदृश्य पर नजर रखेंगे। जानकारों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
पिछले हफ्ते घरेलू शेयर बाजार में दर्ज की गई भारी गिरावट
लाइवलॉन्ग वेल्थ के फाउंडर और रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद के ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की स्थिति और अमेरिका-ईरान बातचीत में गतिरोध से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है और ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए तेल की ऊंची कीमतें सबसे अहम आर्थिक कारक हैं, क्योंकि इससे महंगाई, रुपये और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ता है। बताते चलें कि पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स 1829.33 अंक (2.33 प्रतिशत) और निफ्टी 455.6 अंक (1.87 प्रतिशत) की गिरावट के साथ बंद हुए थे।
















