सरकारी बैंकों के लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. सरकार ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सैलरी बढ़ाने की प्रक्रिया जल्द शुरू करें. इसे हर हाल में 12 महीने के भीतर पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है, ताकि 1 नवंबर 2027 से कर्मचारियों को बढ़ी हुई पगार बिना किसी लेटलतीफी के मिल सके.
लंबे समय से सरकारी बैंकों की ब्रांच में बैठकर ग्राहकों को निरंतर सेवाएं दे रहे बैंक कर्मचारियों के लिए दिल्ली से एक बड़ी राहत की खबर आई है. आमतौर पर सैलरी बढ़ने या वेज रिवीजन (वेतन संशोधन) के नाम पर कर्मचारियों को महीनों और कभी-कभी सालों का लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है.
सरकार का सीधा निर्देश है कि पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSB) में वेतन वृद्धि की प्रक्रिया में अब कोई लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके लिए 13वें द्विपक्षीय समझौते (बाइ-पार्टाइट सेटलमेंट) की बातचीत जल्द से जल्द शुरू करने और इसे महज एक साल के भीतर पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है. इसका मतलब है कि 1 नवंबर 2027 से लागू होने वाला नया वेतनमान बिना किसी बाधा के कर्मचारियों के खाते में तय समय पर पहुंचना चाहिए.
वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाले वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने स्थिति को भांपते हुए 20 अप्रैल को सभी सरकारी बैंकों के प्रमुखों को एक अहम निर्देश भेजा है. इसमें साफ कहा गया है कि बैंक प्रबंधन, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और कर्मचारी यूनियनों के बीच होने वाली बातचीत की तैयारी अभी से शुरू कर दें. सरकार की मंशा स्पष्ट है, यह पूरी नेगोशिएशन प्रक्रिया अधिकतम 12 महीनों में निपट जानी चाहिए.
दरअसल, पिछले वेतन समझौतों के दौरान यह देखा गया था कि मुख्य सेटलमेंट तो हो जाता है, लेकिन उससे जुड़े नियमों में बदलाव करने में काफी वक्त लग जाता है. इसका खामियाजा सीधे तौर पर बैंक स्टाफ को उठाना पड़ता है. इस बार मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि अगले पीरियड की शुरुआत से पहले सारे जरूरी नियमों में बदलाव भी पूरे कर लिए जाएं, ताकि 1 नवंबर 2027 को कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी का लाभ मिल सके.
बैंकों के रिकॉर्ड मुनाफे का मिलेगा सीधा इनाम
इस बार वेतन संशोधन की राह इसलिए भी आसान नजर आ रही है क्योंकि सरकारी बैंकों की आर्थिक सेहत इस वक्त अपने सबसे बेहतरीन दौर में है. अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो वित्त वर्ष 2023 (FY23) में इन बैंकों का कुल मुनाफा 1.05 लाख करोड़ रुपये था. यह आंकड़ा शानदार ग्रोथ के साथ FY24 में उछलकर 1.41 लाख करोड़ रुपये और FY25 में 1.78 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया.
सिर्फ मुनाफा ही नहीं, बैंकों की बैलेंस शीट भी काफी मजबूत हुई है. सितंबर 2025 तक ग्रॉस एनपीए (NPA) रिकॉर्ड 2.30% के निचले स्तर पर आ गया है, जबकि नेट एनपीए लगभग 3% पर है. इसके साथ ही, कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 15.96% पर बरकरार है. बैंकों की यह मजबूत वित्तीय स्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रबंधन के पास अपने कर्मचारियों को बेहतर वेतन देने के लिए पर्याप्त पूंजी और क्षमता दोनों मौजूद हैं.
किन कर्मचारियों की जेब होगी भारी?
हर पांच साल में होने वाले इस वेज रिवीजन का सीधा फायदा न सिर्फ सरकारी बैंकों के लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों को मिलेगा, बल्कि पूरे बैंकिंग सेक्टर के एक बड़े हिस्से पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा. इस वेतन समझौते के दायरे में कई पुराने प्राइवेट बैंक और कुछ विदेशी बैंकों के कर्मचारी भी आते हैं.
















