ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा सनातन धर्म के सबसे पवित्र और भव्य उत्सवों में से एक है। हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को शुरू होने वाला यह उत्सव केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में आस्था का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मुख्य मंदिर से बाहर आते हैं। यहां से तीनों देवी-देवता भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर, यानी गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा लगभग 3 किलोमीटर लंबी होती है, जहां वे सात दिनों तक विश्राम करते हैं। इस उत्सव की सबसे खास बात इसके तीन विशाल और भव्य रथ हैं। इन्हें हर साल पूरी तरह लकड़ी से नए सिरे से बनाया जाता है, जिसमें एक भी कील या धातु का उपयोग नहीं होता। इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई यानी आज से हो रही है। इस खास मौके पर लोग अपनों को शुभकामनाएं भी भेजते हैं। अगर आप भी अपने करीबियों को जगन्नाथ रथ यात्रा की शुभकामनाएं देना चाहते हैं तो यहां से विशेज भेज सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि प्रेम, समानता और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन जाति, धर्म और वर्ग का कोई भेद नहीं रहता। लाखों श्रद्धालु एक साथ भगवान के रथ को खींचते हैं और स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। मान्यता है कि रथ की रस्सी को स्पर्श करने या उसे खींचने मात्र से भी व्यक्ति को कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।रथयात्रा के लिए हर वर्ष विशेष परंपराओं का पालन करते हुए नीम की लकड़ी से तीन भव्य रथ तैयार किए जाते हैं। सबसे आगे भगवान बलभद्र का रथ ‘तालध्वज’ चलता है, जिसका रंग लाल और हरा होता है। इसके पीछे देवी सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ या ‘पद्मरथ’ चलता है, जिसे नीले और काले रंग से सजाया जाता है। सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का विशाल रथ ‘नंदिघोष’ या ‘गरुड़ध्वज’ चलता है, जो लाल और पीले रंग से सुसज्जित होता है। इन रथों का निर्माण पारंपरिक नियमों और धार्मिक विधि-विधान के अनुसार किया जाता है।
रथयात्रा के दौरान श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA), छत्तीस निजोग और विभिन्न अनुष्ठान समितियां मिलकर पूरे कार्यक्रम का संचालन करती हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, आज शाम भगवान के रथों को श्रद्धालुओं द्वारा खींचा जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं।भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सनातन परंपरा में सेवा, भक्ति और समर्पण का अद्भुत उदाहरण मानी जाती है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान का स्मरण करते हुए रथयात्रा में शामिल होता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। यही कारण है कि पुरी की रथयात्रा को दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।















