Raigarh News : RGHNEWS @प्रशांत तिवारी रायगढ़। ग्राम पंचायत तारापुर के उप सरपंच राजू डनसेना की गिरफ्तारी के बाद रायगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। गिरफ्तारी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और कांग्रेस नेता कोतरारोड थाने पहुंच गए। ग्रामीणों ने थाने का घेराव कर विरोध जताया, जबकि खरसिया विधायक उमेश पटेल समेत कांग्रेस नेताओं ने थाने में धरना शुरू कर दिया। समाचार लिखे जाने तक विरोध जारी था।

अविश्वास प्रस्ताव की पहल के बाद गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, तारापुर के उप सरपंच राजू डनसेना ने ग्राम सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल की थी। इसी बीच पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी किए जाने से ग्रामीणों और कांग्रेस नेताओं में नाराजगी फैल गई। कांग्रेस का आरोप है कि गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक दबाव हो सकता है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ST/SC एक्ट से जुड़े मामले में कार्रवाई का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, उप सरपंच को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कर थाने लाया गया। हालांकि, उपलब्ध समाचारों में मामले की विस्तृत धाराएं, शिकायतकर्ता और गिरफ्तारी की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
विधायक उमेश पटेल समेत कांग्रेस नेताओं का धरना
गिरफ्तारी के विरोध में खरसिया विधायक उमेश नन्द कुमार पटेल, जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष नगेंद्र नेगी, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता कोतरारोड थाने पहुंचे। नेताओं ने थाने में ही धरना शुरू कर दिया।
धरने के दौरान विधायक उमेश पटेल ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कर रही है। उन्होंने गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
ग्रामीणों का सवाल—गिरफ्तारी की वजह क्या?
ग्रामीणों का कहना है कि उप सरपंच की गिरफ्तारी को लेकर उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से वे थाने पहुंचे और पुलिस से कार्रवाई का कारण स्पष्ट करने की मांग की। ग्रामीणों का विरोध अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी चाहते हैं।

पुलिस के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि उप सरपंच के खिलाफ किस मामले में कार्रवाई की गई, गिरफ्तारी किन परिस्थितियों में हुई और पुलिस के पास क्या साक्ष्य हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, समाचार लिखे जाने तक पुलिस और प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया था। ऐसे में मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति पुलिस के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगी।















