Puc Rule change अगर आप दिल्ली-एनसीआर में अपनी कार, बाइक या कोई भी गाड़ी चलाते हैं, तो 1 अक्टूबर 2026 से सावधान हो जाइए. दिल्ली-एनसीआर में No PUC, No Fuel (नो पीयूसी, नो फ्यूल) का कड़ा नियम लागू हो चुका है. यानी अगर आपकी गाड़ी का पोल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट अमान्य या एक्सपायर हुआ, तो आपको किसी भी पेट्रोल पंप से पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा.
दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगा दिए गए हैं, जो तुरंत स्कैन कर लेंगे कि आपकी गाड़ी का पीयूसी वैलिड है या नहीं.
Read more Jio: Jio का एनिवर्सरी ऑफर, JioBharat 4G फोन पड़ेगा सिर्फ ₹299, जानें सबकुछ
लेकिन यहां एक बड़ा और सबसे काम का सवाल उठता है – क्या आपकी गाड़ी के पास अगर वैलिड PUC सर्टिफिकेट है, तो इसका मतलब यह है कि आपकी गाड़ी प्रदूषण नहीं फैला रही? आइए, समझते हैं कि पीयूसी टेस्ट का असली गणित क्या है, यह क्या चेक करता है और कौन सी खतरनाक गैसें इससे छूट जाती हैं.
पीयूसी (PUC) टेस्ट आखिर क्या चेक करता है?
जब आप अपनी गाड़ी का पीयूसी टेस्ट करवाते हैं, तो मशीन केवल चुनिंदा गैसों का ही स्तर मापती है. पेट्रोल, सीएनजी (CNG) और एलपीजी (LPG) गाड़ियों में केवल कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकार्बन (HC) का स्तर चेक किया जाता है. वहीं डीजल गाड़ियों में सिर्फ धुएं का गाढ़ापन यानी स्मोक ओपेसिटी (Smoke Opacity) देखा जाता है.
टेस्ट में क्या छूट जाता है?
विशेषज्ञों और इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्ट (ICCT) के अनुसार, मौजूदा पीयूसी टेस्ट हवा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले दो बड़े प्रदूषकों को चेक ही नहीं करता:
NOx (नाइट्रोजन ऑक्साइड): यह जहरीली गैस हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है और स्मॉग/ओजोन बनाती है.
PM / PN (पार्टिकुलेट मैटर / पार्टिकल नंबर): यह हवा में घुलकर कैंसर जैसी बीमारियों की वजह बनने वाले बेहद सूक्ष्म कण होते हैं.
साफ शब्दों में कहें तो अगर आपकी गाड़ी का पीयूसी पास हो गया है, तो इसका मतलब सिर्फ इतना है कि वह उन 2-3 चीजों में पास हुई है जो टेस्ट में देखी गईं. इसका यह मतलब कतई नहीं है कि आपकी गाड़ी से हानिकारक NOx या जहरीले कण नहीं निकल रहे.
क्या नया पीयूसी पास वाहन भी फैला सकता है पॉल्यूशन?
हां बिल्कुल. आधुनिक डीजल (BS-6) गाड़ियों में धुएं को रोकने के लिए डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) लगा होता है. लेकिन पीयूसी की पुरानी तकनीक इस बात को नहीं पकड़ पाती कि यह फिल्टर सही काम कर रहा है या नहीं. यूरोप जैसे देशों में इसके लिए नए तरीके के पार्टिकल नंबर टेस्ट इस्तेमाल होते हैं.
क्या नो पीयूसी, नो फ्यूल नियम से प्रदूषण घटेगा?
Puc Rule change कदम यकीनन लोगों को समय पर पीयूसी बनवाने के लिए मजबूर करेगा, जिससे सिस्टम में ढिलाई कम होगी. लेकिन प्रदूषण में कितनी कमी आएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सड़क पर चलने वाली वाकई सबसे ज्यादा धुआं फेंकने वाली गाड़ियों को पकड़ा जा रहा है या नहीं














