Raigarh News : रायगढ़। जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष शाखा यादव ने रायगढ़ जिले के संबलपुरी क्षेत्र में शासकीय आवंटित भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री, जंगलों की कटाई और पहाड़नुमा वन क्षेत्र को समतल करने के मामले पर भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि पर्यावरण मंत्री के गृह जिले में सरकारी जमीनों की जिस तरह बंदरबांट हो रही है, वह शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस जमीन का उपयोग जनहित और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए, उसे कथित तौर पर पूंजीपति और भाजपा से जुड़े प्रभावशाली लोगों के फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जंगलों को काटकर जमीन का स्वरूप बदल दिया जा रहा है और जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई के बजाय उन्हें बचाने की कोशिशों की खबरें सामने आ रही हैं।
शाखा यादव ने कहा कि संबलपुरी में वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष द्वारा सितंबर माह में ही वन क्षेत्र में हो रही अवैध कटाई और जमीन की खुदाई की शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद जब प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा तो वहां जंगल की जमीन से छोटे-बड़े हजारों पेड़ों को काटकर जमीन में दफनाने और पहाड़नुमा वन क्षेत्र का समतलीकरण किए जाने की स्थिति सामने आई। मौके पर तीन जेसीबी मशीनों और पांच ट्रैक्टरों सहित भारी मशीनरी की मौजूदगी तथा कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि जंगल को नुकसान पहुंचाने का काम अचानक नहीं, यह सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को वन प्रबंधन समिति संबलपुरी के अध्यक्ष शोलालाल निषाद द्वारा रायगढ़ एसडीएम से शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर प्रशासनिक जांच और कार्रवाई शुरू हुई। संबलपुरी में खसरा नंबर 251/2, रकबा 1.213 हेक्टेयर, खसरा नंबर 251/3, रकबा 0.405 हेक्टेयर, खसरा नंबर 251/4, रकबा 0.202 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 252/2, रकबा 0.809 हेक्टेयर सहित कुल 2.629 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे और समतलीकरण की स्थिति सामने आई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि जंगल के बीच जमीन की खुदाई, पेड़ों की कटाई और समतलीकरण के लिए जेसीबी, ट्रैक्टर तथा हाइवा का उपयोग किया जा रहा था।
शाखा यादव ने आगे कहा कि इस मामले में जमीन के मूल आवंटन, उसकी खरीद-बिक्री और वर्तमान कब्जे की निष्पक्ष जांच जरूरी है। संबलपुरी की खसरा नंबर 251/1 की 1.505 हेक्टेयर जमीन को शासकीय भूमि बताया गया है। वहीं खसरा नंबर 251/2, 251/3, 251/4 और 251/5 के कुछ हिस्सों को निजी व्यावसायिक भूमि के रूप में दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकारी जमीन किस प्रक्रिया के तहत किसके नाम पर पहुंची, उसका आवंटन किस उद्देश्य से किया गया था और क्या जमीन की खरीद-बिक्री तथा उपयोग में नियमों का पालन हुआ है। यदि आवंटित जमीन का इस्तेमाल जंगल काटकर व्यावसायिक लाभ कमाने के लिए किया गया है, तो संबंधित अधिकारियों और जमीन के वर्तमान मालिकों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
जिला कांग्रेस कमेटी के ग्रामीण अध्यक्ष नगेन्द्र नेगी ने कहा कि संबलपुरी में सामने आया यह मामला जमीन के कब्जे या अवैध कटाई तक उस पूरे तंत्र पर सवाल है, जिसमें सरकारी जमीनों का आवंटन आम लोगों और जनहित के लिए होना चाहिए, लेकिन कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के हाथों में पहुंचने के बाद उनका स्वरूप ही बदल दिया जाता है। वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होना और अब हिरासत में लिए गए लोगों के राजनीतिक रसूख तथा मिलीभगत के कारण छूटने की खबरें सामने आना अत्यंत संदेहास्पद है। यदि आरोपियों को किसी राजनीतिक दबाव या संरक्षण के कारण राहत दी जा रही है, तो यह कानून और पर्यावरण दोनों के साथ अन्याय होगा।
नगेन्द्र नेगी ने कहा कि सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि यह पूरा मामला पर्यावरण मंत्री के गृह जिले रायगढ़ में सामने आया है। मंत्री जी एक तरफ पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण की बातें करते हैं, दूसरी तरफ उनके गृह जिले में शासकीय आवंटित जमीनों की कथित खरीद-बिक्री, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक वन क्षेत्र को नष्ट किए जाने पर उनकी चुप्पी समझ से परे है। क्या पर्यावरण मंत्री को अपने गृह जिले में जंगलों के उजड़ने की जानकारी नहीं है? या फिर राजनीतिक रसूख के सामने उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से आंखें मूंद ली हैं? यह मौन सामान्य नहीं, बल्कि संदेह पैदा करने वाला है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पूरे प्रदेश में *“एक पेड़ मां के नाम”* का नारा देकर पर्यावरण संरक्षण का दिखावा कर रही है, जबकि दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के मूल जंगलों और प्राकृतिक वन क्षेत्रों को उद्योगपतियों तथा पूंजीपति वर्ग के हितों के लिए कटाई किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। एक ओर पौधे लगाने के प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, दूसरी ओर वर्षों में विकसित हुए जंगलों को मशीनों से उजाड़ दिया जाता है। सरकार को बताना चाहिए कि लगाए गए पौधों की संख्या की तुलना में काटे गए पेड़ों और नष्ट किए गए जंगलों का हिसाब कौन देगा?
जिला कांग्रेस कमेटी की मांग है कि संबलपुरी की शासकीय एवं आवंटित भूमि के मूल रिकॉर्ड, खसरा नंबर 251 और 252 से संबंधित दस्तावेजों, जमीन की रजिस्ट्री तथा आवंटन की शर्तों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष की शिकायत पर हुई कार्रवाई का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। मौके से जब्त मशीनों और हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में प्रशासन स्पष्ट जानकारी दे तथा किसी भी राजनीतिक दबाव में आरोपियों को संरक्षण न दिया जाए। जंगलों की अवैध कटाई में संलिप्त लोगों के साथ-साथ यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई हो।
*शाखा यादव और नगेन्द्र नेगी ने कहा कि सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है और जंगल आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। इन्हें राजनीतिक संरक्षण में पूंजीपतियों के लाभ का साधन बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। भाजपा सरकार को वृक्षारोपण के नारों से आगे बढ़कर रायगढ़ के जंगलों और सरकारी जमीनों की रक्षा के लिए जवाबदेही तय करनी होगी। कांग्रेस इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आवाज उठाती रहेगी।*
















