भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दस्त और उल्टी की महामारी सी फैल चुकी हैं। इस का कारण है पीने का पानी गंदा होना। इस महामारी से कम से कम 14 मरीजों की मौत होगई है और 1400 से ज्यादा लोग बीमार हैं।
बता दें कि इंदौर पिछले 8 सालों से लगातार भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना जाता रहा है, ऐसे में पीने के दूषित पानी से हुई मौतों ने लोगों को हैरान कर दिया है। चिंता की बात यह है कि अभी भी दर्जनों लोगों को हालत गंभीर होने की वजह से आईसीयू में रखा गया है।
CMHO
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी कि CMHO डॉक्टर माधव प्रसाद हसानी ने गुरुवार को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में साफ हुआ है कि भागीरथपुरा इलाके में पीने का पानी पाइपलाइन में रिसाव की वजह से गंदा हो गया था। इसी इलाके से महामारी की शुरुआत हुई है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया, ‘हम भागीरथपुरा की पीने के पानी की पाइपलाइन की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि पता चले कि कहीं और भी रिसाव तो नहीं है।’ उन्होंने कहा कि जांच के बाद गुरुवार को पाइपलाइन से घरों में साफ पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है,
दुबे ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर भागीरथपुरा का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भागीरथपुरा के 1714 घरों का सर्वे किया गया जिसमें 8571 लोगों की जांच की गई। इनमें से 338 लोगों को उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण थे, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक इलाज दिया गया। उन्होंने कहा कि महामारी शुरू होने के 8 दिनों में कुल 272 मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया जिनमें से अब तक 71 को छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 32 की हालत गंभीर होने से ICU में रखा गया है।












