छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने एक सराहनीय और मानवीय पहल की है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर यह सुझाव दिया है कि मृत्योपरांत अंगदान करने वाले व्यक्तियों को राजकीय सम्मान प्रदान करने की नीति पर राज्य सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
क्या लिखा है पत्र में ?
डॉ. रमन सिंह ने अपने पत्र में देश में अंगदान की मौजूदा स्थिति को चिंताजनक बताया है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर केवल 0.34 प्रतिशत लोग ही अंगदान कर रहे हैं। इस बेहद कम दर के कारण आंख, किडनी, लीवर और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों की भारी कमी बनी रहती है। परिणामस्वरूप हर साल लाखों लोग समय पर अंग न मिलने के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। यदि अंगदान को सम्मान और पहचान मिले, तो यह स्थिति बदली जा सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष ने पत्र में यह भी लिखा है कि छत्तीसगढ़ अंगदान के क्षेत्र में देश के कई राज्यों से पीछे है। उन्होंने तमिलनाडु और कर्नाटक का उदाहरण देते हुए बताया कि इन राज्यों में अंगदाताओं को राजकीय सम्मान दिए जाने के निर्णय के बाद अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता और सहभागिता बढ़ी है।
सम्मान से बढ़ेगी अंगदान की सामाजिक स्वीकृति
डॉ. रमन सिंह का मानना है कि जब किसी सामाजिक कार्य को सरकारी स्तर पर सम्मान मिलता है, तो आम लोग उससे जुड़ने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस विषय पर संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच के साथ निर्णय लिया जाए। यदि राज्य सरकार इस दिशा में नीति बनाकर संबंधित विभागों को निर्देश देती है, तो इससे छत्तीसगढ़ में अंगदान को सम्मान, प्रेरणा और सामाजिक स्वीकार्यता मिलेगी।
पत्र के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष ने यह संदेश दिया है कि अंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता का सर्वोच्च रूप है। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को लागू करती है, तो इससे न केवल अंगदाताओं को सम्मान मिलेगा, बल्कि हजारों गंभीर मरीजों को नया जीवन भी मिल सकेगा।















