बजट पेश करने की तारीख नजदीक आ रही है। वैसे-वैसे देश के करोड़ों होम लोन धारकों और मीडियम क्लास की धड़कनें तेज हो रही हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना नौवां बजट पेश करने वाली हैं, और इस बार का सबसे बड़ा सस्पेंस होम लोन और टैक्स डिडक्शन पर टिका है।
भारतीय रियल एस्टेट बाजार में घरों की बढ़ती कीमतों और ब्याज दरों के बीच आम आदमी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या इस बजट में EMI का बोझ कम करने के लिए सरकार कोई मास्टरस्ट्रोक खेलेगी।
वर्तमान में होम लोन के ब्याज पर अधिकतम 2 लाख रुपये की छूट मिलती है। यह सीमा साल 2014-15 से नहीं बदली गई है। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स और CREDAI जैसे संगठनों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में घरों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, इसलिए इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम 4 लाख रुपये से 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।
EMI घटेगी या बढ़ेगी?
- सस्ता घर: अगर सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा (अभी 45 लाख रुपये) को बदलकर 65-75 लाख रुपये तक ले जाती है, तो ज्यादा लोग सब्सिडी और सस्ते लोन के दायरे में आ पाएंगे।
- टैक्स सेविंग: यदि टैक्स डिडक्शन की सीमा बढ़ती है, तो आपकी टैक्स बचत बढ़ेगी, जिससे आपकी जेब पर EMI का शुद्ध बोझ कम हो जाएगा।
क्या हैं मांग
होम लोन के मूलधन पर सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये की छूट मिलती है। समस्या यह है कि इसी 1.5 लाख रुपये में PPF, LIC और बच्चों की फीस भी शामिल होती है। मांग यह है कि होम लोन के मूलधन के लिए एक अलग सेक्शन बनाया जाए, ताकि घर खरीदने वालों को ठोस राहत मिल सके।
फिलहाल नई टैक्स व्यवस्था में होम लोन के ब्याज पर कोई छूट नहीं मिलती। मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सरकार न्यू टैक्स रिजीम में भी होम लोन और इंश्योरेंस पर डिडक्शन का लाभ देना शुरू करे।














