बांग्लादेश की राजनीति में एक नये अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में लैंडस्लाइड विक्ट्री हासिल की है।
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान के बेटे हैं। वह 36 साल बाद देश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। हालांकि उनके लिए यह सफर आसान नहीं था। इससे पहले उन्होंने 17 साल का निर्वासन भी झेला है।
जेल गए
इसके साथ ही जेल, यातनाएं और राजनीतिक साजिशों के शिकार भी हुए हैं। तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ। पिता जिया-उर-रहमान बीएनपी के संस्थापक और पूर्व राष्ट्रपति थे। जबकि उनकी मां खालिदा जिया 3 बार देश की प्रधानमंत्री रहीं।
क्यों और कैसे हुआ तारिक का निर्वासन?
साल 2006-07 में देश राजनीतिक अस्थिरता के चलते सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया। मार्च 2007 में तारिक को रातों-रात गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर 84 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें घोटालों से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 में हुए ग्रेनेड हमले का आरोप तक शामिल थे। हालांकि बीएनपी दावा करती रही ये सब उनकी प्रतिद्वंदी शेख हसीना की साजिश थीं। तारिक को जेल जाने के बाद वहां यातनाएं भी झेलनी पड़ीं, इसी दौरान उनकी रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गई। सितंबर 2008 में जमानत पर रिहा होने के बाद ‘चिकित्सा’ के बहाने वे पत्नी जुबैदा और बेटी ज़ैमा के साथ लंदन चले गए। 11 सितंबर 2008 को उनका विमान उड़ा तो लगातार वह 17 साल तक स्वनिर्वासन में रहे। इसके बाद वह देश नहीं लौटे और लंदन से बीएनपी की कमान संभाले रखी। उन्होंने वीडियो कॉल से पार्टी और कार्यकर्ताओं के साथ रणनीतियां बनानी शुरू कीं।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल के शासन में एक मामले में उन्हें मौत की सजा तक सुनाई गई। मगर उन्होंने अपना निर्वासन जारी रखा। वह बांग्लादेश वापस नहीं लौट रहे थे। उनकी स्वदेश वापसी का सफर अगस्त 2024 में शेख हसीना के खिलाफ हुए उस छात्र आंदोलन से हुआ, जिसमें आंदोलनकारियों ने आवामी लीग को सत्ता से उखाड़ फेंका।
नर्म स्वभाव वाले नेता
तारिक के ढाका लौटने के कुछ ही दिनों में उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो गया। तारिक सिर्फ 50 दिन बाद चुनावी मैदान में उतरे। उन्होंने ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की। अब एक नई शुरुआत करते हुए उन्होंने बीएनपी की जीत के बाद ‘स्वच्छ राजनीति, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, युवाओं को रोजगार, लोकतंत्र की बहाली’ का वादा किया। 60 वर्षीय तारिक का ‘नरम स्वभाव’ वाले नेता कहे जाते हैं।
















