झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र में हुआ एयर एंबुलेंस हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों का अंत साबित हुआ। रांची से दिल्ली के लिए रवाना हुई मेडिकल इमरजेंसी फ्लाइट खराब मौसम के बीच संतुलन खो बैठी और घने जंगलों में गिरकर पूरी तरह तबाह हो गई।
इस भीषण हादसे में सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक, एयर एंबुलेंस ने शाम करीब 7:11 बजे रांची एयरपोर्ट सउड़ान भरी थी। कुछ ही देर में मौसम बिगड़ गया। तेज हवाएं और कम दृश्यता के कारण पायलट ने रूट बदलने की कोशिश की। उड़ान भरने के लगभग 23 मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क टूट गया। इसके बाद विमान चतरा के सिमरिया जंगल के करम टॉड़ इलाके में गिर गया। हादसा इतना भीषण था कि पायलट, सह-पायलट, मेडिकल स्टाफ, मरीज और परिजन सभी की मौके पर ही मौत हो गई।
दुर्गम जंगल में चला लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन:
विमान सड़क से लगभग चार किलोमीटर अंदर घने जंगल में गिरा था। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और एसएसबी 35वीं बटालियन की टीम मौके पर पहुंची। राहत दल को मलबे तक पहुंचने के लिए पैदल जंगल का कठिन रास्ता तय करना पड़ा। जवानों ने शवों को अपने कंधों पर उठाकर चार किलोमीटर पैदल बाहर लाया, जिसके बाद एंबुलेंस से पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। जंगल में बिखरे विमान के टुकड़े उस भयावह मंजर की गवाही दे रहे थे।:
कर्ज, उम्मीद और एक दर्दनाक अंत:
इस एयर एंबुलेंस हादसे ने कई परिवारों को आर्थिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया। किसी ने बेटे की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था, तो किसी ने इलाज के लिए उधार। सबको उम्मीद थी कि दिल्ली पहुंचकर जिंदगी बच जाएगी और कर्ज चुकाने का मौका मिलेगा। लेकिन सिमरिया के जंगलों में गिरा वह विमान सिर्फ सात जिंदगियां ही नहीं ले गया, बल्कि कई घरों की उम्मीदें भी साथ ले गया।















