अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 26 दिनों से जारी जंग जल्द खत्म होने वाली है? भले मिडिल ईस्ट की जमीन पर हमले नहीं रुके हैं लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और खुद ईरान की तरफ से ऐसे संकेत मिले हैं जो बता रहे हैं कि जल्द शांति की उम्मीद की जा सकती है. अमेरिका और इजरायल ने जंग शुरू करते समय ईरान में जो हासिल करने का सपना देखा था, वो तो उसे हासिल होता नहीं दिख रहा है लेकिन अब ट्रंप साफ संकेत दे रहे हैं कि वो किसी कीमत पर जल्द से जल्द जंग खत्म करना चाहते हैं. डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना की पेशकश की है. वहीं ईरान ने भी पॉजिटिव मैसेज दिया है और कहा है कि वह होर्मुज के रास्ते ‘गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों’ को गुजरने की अनुमति देगा.
अमेरिका की ओर से पॉजिटिव संकेत
न्यूयॉर्क टाइम्स ने ट्रंप सरकार के अधिकारियों (नाम का खुलासा नहीं) के हवाले से कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को जंग खत्म करने के लिए. वहीं इजरायल के चैनल 12 ने कहा कि ट्रंप ने ईरान के सामने एक महीने के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है, जिसके दौरान दोनों एक प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे जिसमें ईरान के समृद्ध यूरेनियम (शुद्ध या एनरिच किए यूरेनियम) को सौंपना और आगे एनरिच करने पर प्रतिबंध लगाना शामिल होगा.
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग भी सुनिश्चित करेगा. इजरायली रिपोर्ट में कहा गया है कि बदले में ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया जाएगा, जो वर्षों से अलग-अलग रूपों में लगे हुए हैं. ईरान को बुशहर में नागरिक परमाणु ऊर्जा विकसित करने में भी सहायता मिलेगी, जो 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले का एक प्रमुख स्थल है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान ने उन्हें एक कीमती गिफ्ट भेजा है. ट्रंप ने मंगलवार, 24 मार्च को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, “उन्होंने (ईरान) कल कुछ ऐसा किया जो वास्तव में अद्भुत था. उन्होंने हमें एक तोहफा दिया और वह तोहफा आज पहुंच गया. और वह बहुत बड़ा तोहफा था, जिसकी कीमत बहुत ज्यादा थी… मेरे लिए इसका मतलब एक ही था- हम सही लोगों से बात कर रहे हैं.” उन्होंने ज्यादा डिटेल्स नहीं दिया, लेकिन कहा कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है.
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ईरान ने अभी तक अमेरिका के साथ किसी तरह की वार्ता की पुष्टि नहीं की है
ओर से पॉजिटिव मैसेज
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) को जारी एक बयान के अनुसार, ईरान ने कहा है कि ऐसे जहाज जो जंग में शामिल नहीं हैं, वे होर्मुज के जलडमरूमध्य को पार कर सकते हैं. बयान में कहा गया है, “गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज… बशर्ते कि वे ईरान के खिलाफ आक्रामक में न तो भाग लेते हैं और न ही उनका समर्थन करते हैं – और घोषित सुरक्षा और सुरक्षा नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं – वे सक्षम अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेशन में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित मार्ग से लाभ उठा सकते हैं.”
बता दें कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में इस जलडमरूमध्य को काफी हद तक बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें तेजी से बढ़ गई.
तेल की कीमतों में राहत
युद्धविराम की बढ़ती उम्मीदों के बीच बुधवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई. सुबह 10:40 बजे तक ब्रेंट क्रूड वायदा 7 प्रतिशत गिरकर 97.18 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर आ गया, जबकि यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड 6 प्रतिशत से अधिक गिरकर 86.72 डॉलर पर आ गया. विशेषज्ञों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया सुधार से महंगाई और चालू खाता घाटा (सीएडी) सहित भारत के व्यापक आर्थिक संकेतकों को कुछ राहत मिल सकती है. उनके अनुसार, “पिछले सप्ताह कमोडिटी बाजार में तेजी से गिरावट आई, तेल हाल की ऊंचाई से पीछे हट गया है, ब्रेंट क्रूड, जो 101 डॉलर प्रति बैरल के करीब के स्तर को छू गया था, 10 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जिससे भारत के तेल आयात बिल, चालू खाता घाटा और रुपये के दबाव पर तत्काल चिंताएं कम होगीं.
















