गर्मी आने से पहले ही आम लोगों को बड़ा झटका लग सकता है। इस बार एयर कंडीशनर (AC) खरीदना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। वजह है LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कमी, जिसने देश की AC मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को मुश्किल में डाल दिया है। कंपनियां बढ़ती लागत और सप्लाई संकट के बीच जूझ रही हैं, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण LPG की उपलब्धता कम हो गई है। सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्रायोरिटी दी है, जिससे इंडस्ट्री के लिए LPG की सप्लाई घट गई है।
AC बनाने की प्रक्रिया में LPG का इस्तेमाल खासतौर पर ब्रेजिंग के लिए होता है, जो बेहद जरूरी चरण है। ऐसे में LPG की कमी से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। LPG की कमी के चलते कई कंपनियों ने ऑक्सी एसिटिलीन गैस का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। हालांकि, यह ऑप्शन महंगा है और इसकी सप्लाई भी आयात पर निर्भर करती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के करीब 94% लाइमस्टोन आयात मिडिल ईस्ट से होते हैं, जिससे यह ऑप्शन भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
AC की कीमतों में हो चुकी है बढ़ोतरी
बढ़ती लागत का असर अब ग्राहकों तक पहुंचने लगा है। कई कंपनियां पहले ही 5% से 10% तक कीमतें बढ़ा चुकी हैं। कुछ बड़ी कंपनियों ने AC के दाम में 10% तक की बढ़ोतरी की है, जबकि अन्य प्रोडक्ट्स में भी 5% तक इजाफा किया गया है। जनवरी 2026 से ही कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
डिमांड पर भी पड़ा असर
पिछले साल कमजोर गर्मी और इस साल उत्तर भारत में बेमौसम बारिश के कारण AC की मांग पर भी असर पड़ा है। ऐसे में कंपनियां दोहरी मार झेल रही हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि लागत बढ़ने और नए स्टार रेटिंग नियमों के कारण कंपनियों को 8% से 14% तक कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। हालांकि, ब्रांड्स को उम्मीद है कि गर्मी बढ़ने के साथ बिक्री में सुधार होगा, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए चुनौतियां बनी रहेंगी














