ATF या जेट फ्यूल की कीमतों को लेकर तेल कंपनियों ने यू-टर्न ले लिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की पीएसयू तेल विपणन कंपनियों द्वारा नागरिक उद्योग मंत्रालय के परामर्श से घरेलू एयरलाइंस के लिए केवल 25% यानी 15 रुपये प्रति लीटर की आंशिक और चरणबद्ध बढ़ोतरी लागू करने का फैसला लिया गया है। मंत्रालय की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कहा गया कि विदेशी मार्गों पर ATF की कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का भुगतान करना होगा, ठीक वैसे ही जैसा वे दुनिया के दूसरे हिस्सों में करते हैं।
तेल मार्केटिंग कंपनियों ने ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के लिए अपनी पहले की दर घोषणा को वापस लेने के बाद उनके द्वारा घोषित नई दरें इस प्रकार हैं।
दिल्ली: ₹1,04,927; कोलकाता: ₹1,09,450; मुंबई: ₹98,247; चेन्नई: ₹1,09,873 प्रति किलो लीटर। ये संशोधित दरें आज, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हैं।
ATF की कीमतें 2001 से नियंत्रण-मुक्त
मंत्रालय का कहना है कि भारत में ATF की कीमतें 2001 में नियंत्रण-मुक्त कर दी गई थीं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के एक फ़ॉर्मूले के आधार पर हर महीने इनमें बदलाव किया जाता है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के बंद होने और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में बनी असाधारण स्थिति के कारण, 1 अप्रैल को घरेलू बाज़ारों के लिए ATF की कीमतों में 100% से ज़्यादा की बढ़ोतरी होने की उम्मीद थी।
पीएम और पेट्रोलियम मंत्री के हस्तक्षेप के लिए आभार
मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के समय पर और संवेदनशील हस्तक्षेप के लिए मंत्रालय ने आभार व्यक्त किया है। इस संतुलित निर्णय से घरेलू यात्रियों को अचानक बढ़ी हुई हवाई किराये की सीमाओं से राहत मिलेगी, एयरलाइंस का आर्थिक बोझ कम होगा और इस महत्वपूर्ण समय में एविएशन सेक्टर की स्थिरता बनी रहेगी। साथ ही, यह कदम सामान और माल सेटअप की निकासी सुनिश्चित करेगा और व्यापार एवं लॉजिस्टिक्स के लिए आवश्यक हवाई संपर्क बनाए रखने में मदद करेगा।
प्रीमियम पेट्रोल पर भी सरकार ने रुख किया स्पष्ट
मंत्रालय का कहना है कि हाल ही में 2 रुपये प्रति लीटर की जो बढ़ोतरी हुई है, वह सिर्फ़ प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट्स- XP95, Power95, Speed पर लागू होती है। ये हाई-ऑक्टेन परफॉर्मेंस वाले प्रोडक्ट्स हैं, जिनकी कीमतें हर दो हफ़्ते में बदली जाती हैं और जिनकी बिक्री कुल बिक्री का 2% से 5% होती है। गाड़ी चलाने वाले लोग इन्हें अपनी मर्ज़ी से, ज़्यादा कीमत देकर खरीदते हैं। भारत में हर पेट्रोल पंप पर रेगुलर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें पहले जैसी ही बनी हुई हैं, जबकि दुनिया भर के दूसरे देशों में इनकी कीमतें 30-50% तक बढ़ चुकी हैं।















