प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई। करीब ढाई घंटे तक चली इस बैठक में पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर पैदा हुए हालात और उससे निपटने की तैयारियों पर चर्चा हुई है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई CCS की यह दूसरी बैठक है।
बैठक में ये नेता मौजूद
केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, एस. जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जे.पी. नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रह्लाद जोशी, किंजरापु राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी उन लोगों में शामिल हैं जो इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास, तथा कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी इस बैठक में मौजूद रहे।
पिछले रविवार को, अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे “भयंकर युद्ध” से उत्पन्न स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताया और नागरिकों से इन कठिनाइयों से निपटने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने इस संकट का राजनीतिकरण करने के प्रति आगाह करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में स्वार्थ-पूर्ति वाली राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने अफवाहों से बचने की चेतावनी भी दी थी, जिससे देश को नुकसान हो सकता है।
ईरान युद्ध पर दूसरी CCS बैठक
22 मार्च को पीएम मोदी ने मंत्रियों और अधिकारियों के इसी समूह के साथ एक ऐसी ही बैठक की थी, जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी बदलती स्थिति की समीक्षा की गई थी। इस बैठक में नागरिकों के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन शामिल था, जिसमें भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा प्रमुख थे। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष पूरी दुनिया को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर रहा है और नागरिकों को इसके प्रभावों से बचाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
प्रधानमंत्री ने सरकार के सभी अंगों को निर्देश दिया कि वे जनता को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए आपस में समन्वय बनाकर काम करें। इससे पहले, 12 मार्च को उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने एक वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है; उन्होंने इसे ‘राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा’ बताया, जिसका सामना शांति, धैर्य और अधिक जन-जागरूकता के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में आने वाली रुकावटों से निपटने के लिए लगातार काम कर रही है।














