शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बीता हफ्ता किसी रोलरकोस्टर राइड से कम नहीं रहा. एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की सांसें अटका दी हैं, तो दूसरी तरफ कच्चे तेल की आग आम आदमी की जेब तक पहुंचने का रास्ता तलाश रही है. 2 अप्रैल को बाजार खुलते ही जो भारी घबराहट दिखी, उसने निवेशकों के पसीने छुड़ा दिए. लेकिन, दिन ढलते-ढलते निफ्टी ने निचले स्तरों से 500 अंकों की शानदार वापसी करके सबको चौंका दिया और 22,713 के स्तर पर हरे निशान में बंद हुआ. सेंसेक्स ने भी 185 अंकों की बढ़त दिखाई. यह स्थिति एक आम निवेशक के मन में स्वाभाविक रूप से यह सवाल पैदा करती है कि आखिर बाजार किस दिशा में जा रहा है और उनकी गाढ़ी कमाई कितनी सुरक्षित है.
लगातार छठे हफ्ते गिरावट
अगर हम पूरे हफ्ते के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो तस्वीर थोड़ी चिंताजनक नजर आती है. लगातार यह छठा हफ्ता है जब बाजार ने निवेशकों को निराश किया है. सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 0.5 प्रतिशत और 0.4 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई. इस निराशा के पीछे का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कूटनीतिक समझौता नहीं होता है, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर कड़ा प्रहार किया जा सकता है. इस एक आक्रामक बयान ने ब्रेंट क्रूड ऑयल को 109 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया. कच्चे तेल की यह महंगाई सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था, परिवहन लागत और कंपनियों के मुनाफे पर सेंध लगाती है, जिसका खमियाजा अंततः बाजार को भुगतना पड़ता है.
किन शेयरों ने रुलाया, कहां हुई चांदी?
बाजार की इस भारी उथल-पुथल में सभी सेक्टर्स का हाल एक जैसा नहीं रहा. कुल 16 प्रमुख सेक्टर्स में से 12 लाल निशान में बंद हुए. बैंकिंग सेक्टर ने लगातार छठे सप्ताह गोता लगाया है और 1.4 प्रतिशत तक टूटा. यह अक्टूबर 2023 के बाद बैंकिंग शेयरों का सबसे खराब दौर है. इसके पीछे विदेशी मुद्रा कारोबार पर संभावित सख्ती की चिंताएं हावी रहीं.
वहीं, फार्मा शेयरों में भी 3.4 फीसदी की बड़ी गिरावट आई, क्योंकि अमेरिकी प्रशासन उन दवा कंपनियों पर आयात शुल्क लगाने की तैयारी में है जो वहां कीमतें कम करने को राजी नहीं हैं. हालांकि, इस घने अंधेरे में रक्षा क्षेत्र ने उम्मीद की एक नई किरण दिखाई. भारत सरकार द्वारा 25 अरब डॉलर के बड़े रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिलने से डिफेंस शेयरों में 2.4 फीसदी का भारी उछाल आया, जिसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) के शेयर 4.2 प्रतिशत चढ़ गए.
ये फैक्टर्स तय करेंगे बाजार की चाल
अब यक्ष प्रश्न यह है कि अगले हफ्ते बाजार का मिजाज कैसा रहेगा? विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि उतार-चढ़ाव का यह दौर फिलहाल थमने वाला नहीं है. पश्चिमी एशिया के हालातों पर तो निवेशकों की नजर रहेगी ही, साथ ही अब कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों का भी बिगुल बजने वाला है. 9 अप्रैल को देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) अपने नतीजे घोषित करने जा रही है.
यह नतीजे न सिर्फ आईटी सेक्टर बल्कि पूरे परिणाम सीजन का मूड तय करेंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार तिमाही नतीजों पर महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और सुस्त वैश्विक मांग का सीधा प्रहार देखने को मिल सकता है. इसलिए, अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन काफी भिन्न हो सकता है.
निफ्टी में रिकवरी की उम्मीद
चार्ट्स की बारीकियों को समझें तो, भारी गिरावट के बाद बाजार तकनीकी रूप से ‘ओवरसोल्ड’ (अत्यधिक बिकवाली) क्षेत्र में आ गया है. ऐसे में निचले स्तरों से एक तकनीकी वापसी की गुंजाइश पूरी तरह बनती है. बीते सत्र में भारी गिरावट के साथ खुलने के बाद बनी ‘बुलिश कैंडल’ इसी मजबूती का इशारा करती है.
यदि निफ्टी आने वाले दिनों में 22,941 के पिछले हफ्ते के उच्चतम स्तर को पार करने में सफल रहता है, तो यह 23,450 तक की उड़ान भर सकता है. वहीं, अगर बाजार दबाव में रहता है, तो 22,200 से 22,900 के बीच एक सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिलेगा. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए 22,100 से 21,800 का स्तर एक बेहद मजबूत ‘सपोर्ट’ का काम करेगा. वर्तमान माहौल में सतर्कता बरतना और सोच-समझकर कदम उठाना ही बेहतर रणनीति है.















