Papankusha Ekadashi: कल 20अक्टूबर यानि बीते मंगलवार को दशहरा पर्व मनाया गया था, ऐसे में आज एकादशी व्रत होना चाहिए था. हालांकि, तिथियों में बदलाव के कारण लोगो असमंजस में पड़ गए है. कि एकादशी का व्रत आज या कल कब रखना उत्तम होगा. बता दें कि विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना के लिए यह एकादशी का दिन बेहद खास होता है. तो चलिए जानते है व्रत रखने कि सही तिथि और महत्व.
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कब है पापांकुशा एकादशी व्रत?
पापांकुशा एकादशी के लिए आश्विन माह शुक्ल पक्ष की एकादशी का प्रारंभ बुधवार यानि आज 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर हो रहा है. इस तिथि का समापन कल 22 अक्टूबर दिन गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर होगा. ऐसे में आज दोपहर के बाद एकादशी तिथि लग रही है. जबकि, तिथि की मान्यता के लिए उदयातिथि को महत्व दिया जाता है. इस स्थिति में एकादशी व्रत कल यानी गुरुवार 22 अक्टूबर को करना उत्तम रहेगा.

पापांकुशा एकादशी व्रत का महत्व
पापांकुशा एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है. यह व्रत करने और विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस एकादशी व्रत को पापों पर अंकुश लगाने वाला व्रत माना जाता है. इसी वजह से इसे पापांकुशा एकादशी कहते हैं. व्यक्ति को आपने सभी पापों को नष्ट कर मोक्ष की प्राप्ति के लिए पापांकुशा एकादशी व्रत करना चाहिए.
एकादशी व्रत से जुड़े नियम
एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए. क्योंकि इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति के साथ ही घर में सभी लोगों को सात्विक भोजन करना चाहिए. मास-मदिरा और नशे से दूर रहें. एकादशी तिथि पर तुलसी में जल चढ़ाने और तुलसी के पत्तों को छूने से बचना चाहिए. ऐसा माना जाता है. कि एकादशी पर तुलसी का व्रत होता है. व्रत और पूजा के दौरान काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. झूठ बोलने और विवाद करने से बचें. आप विधि विधान से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें. एकादशी व्रत के दूसरे दिन सुबह व्रत का पारण करें. आपको बता दें कि, पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण दिन शुक्रवार यानि 23 अक्टूबर को किया जाएगा. ऐसे में व्रत रखने वाले सुबह 5 बजकर 36 मिनट से लेकर 7 बजकर 54 मिनट के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं.














