मलमास के दौरान जान लें क्‍या करें क्‍या ना करें?

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हिंदी पंचांग के अनुसार इस साल 12 की बजाय 13 महीने होंगे. सावन में अधिकमास या मलमास पड़ने के कारण ऐसा होगा. मलमास को पुरुषोत्‍तम मास भी कहते हैं क्‍योंकि यह महीना भगवान विष्‍णु को समर्पित होता है. सावन माह में मलमास लगने की वजह से इस बार सावन 2 महीने का होगा. हिंदू धर्म में मलमास का विशेष महत्व है क्योंकि इस माह में की गई पूजा-अर्चना का फल ज्‍यादा मिलता है. साथ ही माना जाता है कि पुरुषोत्‍तम मास में भगवान विष्‍णु की पूजा करने से अक्षय पुण्‍य और मोक्ष मिलता है. मलमास को लेकर हिंदू धर्म में कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना चाहिए.

3 साल में एक बार पड़ता है मलमास

 

मलमास या अधिकमास 3 साल में एक बार आता है. दरअसल हिंदी कैलेंडर में गणनाएं सौर और चंद्र मास के आधार पर होती हैं, जिससे हर साल 11 दिनों का अंतर आ जाता है. इस अंतर को समायोजित करने के लिए ही हर 3 साल में एक महीना अधिक पड़ता है, इसे ही अधिकमास कहते हैं. सावन मास में अधिकमास या मलमास पड़ने का संयोग 19 वर्षों बाद लग रहा है.