सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार, 30 दिसंबर को घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी का सिलसिला जारी रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 200 अंकों की गिरावट के साथ 84,500 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 50 अंक फिसलकर 25,880 के स्तर पर आ गया। यह बाजार में लगातार छठा सत्र है, जब निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है।
शुरुआती कारोबार से ही बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा। सेंसेक्स के 30 में से 23 शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, वहीं निफ्टी 50 के 38 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल स्तर पर कमजोरी व्यापक रही और एनएसई के लगभग सभी प्रमुख सूचकांक नुकसान में रहे।
सबसे ज्यादा दबाव मीडिया, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर में देखा गया। बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली के चलते इंडेक्स पर असर पड़ा, जबकि रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की सतर्कता साफ दिखी। मीडिया शेयर, जिनमें पिछले सत्र में तेजी रही थी, आज बिकवाली की चपेट में आ गए।
बाजार की मौजूदा कमजोरी को पिछले कुछ सत्रों की प्रवृत्ति से जोड़कर देखा जा रहा है। 22 दिसंबर को सेंसेक्स करीब 85,567 के स्तर पर था, जिसके बाद से इसमें लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सोमवार को भी बाजार कमजोर बंद हुआ था, जब सेंसेक्स लगभग 345 अंक टूटकर 84,695 पर बंद हुआ था और निफ्टी में करीब 100 अंकों की गिरावट आई थी।
वैश्विक बाजारों से भी मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई हल्की गिरावट में रहा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग स्थिर नजर आया। हांगकांग का हैंगसेंग सीमित बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, वहीं चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली कमजोरी में रहा। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में दबाव देखने को मिला था, जहां डाउ जोंस, नैस्डेक और एसएंडपी 500 सभी लाल निशान में बंद हुए।
निवेशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी है। हालिया सत्र में एफआईआई ने भारी मात्रा में शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार में खरीदारी कर गिरावट को कुछ हद तक थामने की कोशिश की। दिसंबर महीने में अब तक विदेशी निवेशकों की शुद्ध बिकवाली बनी हुई है, जबकि घरेलू निवेशकों ने लगातार समर्थन दिया है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि साल के आखिरी कारोबारी दिनों में निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। वैश्विक संकेत, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और मुनाफावसूली के चलते बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, घरेलू निवेशकों की सक्रियता से लंबी अवधि में बाजार को सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल, निवेशकों की नजर आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेतों, एफआईआई प्रवाह और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर बनी रहेगी।।















