छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव की सराहना की। उन्होंने इस क्षेत्र के बदलते स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि कभी माओवाद और पिछड़ेपन के लिए जाना जाने वाला बस्तर अब विकास और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास की नई कहानी लिख रहा है।
बदल हुआ बस्तर
उन्होंने कहा कि एक समय था जब बस्तर का नाम लेते ही माओवाद और हिंसा की तस्वीरें सामने आती थीं, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोगों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी और कामना की कि आने वाला समय इस क्षेत्र के लिए शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव से भरा हो।
नक्सलवाद के अंत का संकल्प गौरतलब है कि एक दिन पहले ही, नौ फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जगदलपुर में ‘बस्तर पंडुम’ के समापन समारोह में हिस्सा लिया था। उन्होंने घोषणा की कि 31 मार्च 2026 तक भारत से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बस्तर अब ‘बंदूक और गोली’ की जगह ‘पर्यटन और संस्कृति’ का केंद्र बन रहा है। ‘बस्तर पंडुम’ छत्तीसगढ़ सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य बस्तर संभाग की जनजातीय संस्कृति, लोक नृत्य, संगीत और पारंपरिक खेलों को संरक्षित करना है।














