राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता स्व राम अवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अमित जोगी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट के मौजूदा आदेश के अलावा 25 मार्च के आदेश को चुनौती देते हुए एसएलपी दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट युगलपीठ ने अमित जोगी को 20 अप्रैल से पहले याचिका दायर करने कहा है। शीर्ष अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

अमित जोगी की याचिका पर सोमवर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजीव मेहता की युगलपीठ में सुनवाई के दौरान अमित जोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे उपस्थित हुए
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा पारित उपरोक्त दोनों निर्णयों में प्राकृतिक न्याय के मौलिक सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के छह नवंबर 2025 के स्पष्ट आदेश का उल्लंघन करते हुए अमित जोगी को बिना सुनवाई का कोई अवसर दिए दोनों निर्णय पारित किए गए।
याचिकाकर्ता अमित जोगी के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि दो अप्रैल 2026 का हाई कोर्ट का निर्णय, जिसमें पैरा 37 में यह दर्ज है कि यह बिना अमित जोगी को सुने पारित किया गया, सोमवार को ही सुबह छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की वेबसाइट में अपलोड किया गया। इस संबंध में रजिस्ट्रार (न्यायिक) ने उनके अधिवक्ता को दूरभाष पर सूचित किया था।
अमित जोगी ने ये कहा
सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई के लिए तिथि तय होने के बाद अमित जोगी ने अपने फेसबुक वॉल पर एक वीडियो अपलोड किया है। वीडियों में वे बोल रहे हैं कि मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का स्वागत करता हूं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरे साथ हुआ गंभीर अन्याय अब सुधारा जाएगा। सत्य और न्याय की जीत अवश्य होगी।















