खुद का घर खरीदने, नई कार लेने या बच्चों की हायर एजुकेश्न के लिए लोन लेने का सपना आने वाले दिनों में आसान नहीं रह जाएगा. लोन लेन उन लोगों के लिए मुश्किल होगा, जिनका सिबिल (CIBIL) 730 से नीचे है. भारतीय बैंकिंग सिस्टम में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इससे आने वाले समय में बैंकों का लोन देने का मामला पहले से कहीं ज्यादा सतर्क और सख्त बन जाएगा. रिजर्व बैंक (RBI) का नया ‘एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस’ यानी ईसीएल (ECL) फ्रेमवर्क 1 अप्रैल 2027 से लागू होने जा रहा है. नया नियम बैंकों की तरफ से लोन लेने वाले की पात्रता और उनके रिस्क को परखने के पूरे तरीके को बदलकर रख देगा.
हालांकि, रिजर्व बैंक (RBI) के इस कदम का मकसद देश के बैंकिंग सिस्टम को ज्यादा मजबूत, पारदर्शी और सिक्योर बनाना है. इसका दूसरा पहलू यह है कि जब यह लागू हो जाएगा तो करोड़ों लोन आवेदकों को बैंकों की कड़ी स्क्रूटनी से गुजरना होगा. मौजूदा सिस्टम की बात करें तो बैंक आमतौर पर किसी फंसे हुए लोन यानी बैड लोन के लिए प्रोविजनिंग तब ही शुरू करते हैं जब कोई कर्जदार लंबे समय तक ईएमआई (EMI) का भुगतान करने में पूरी तरह नाकाम हो जाता है. इससे उसका लोन अकाउंट एनपीए में बदल जाता है. रिजर्व बैंक का ईसीएल सिस्टम इस पुराने ढर्रे को बदल देगा.
डिफॉल्ट या लोन डूबने का इंतजार नहीं करना होगा
ईसीएल (ECL) के बाद बैंकों को किसी डिफॉल्ट या लोन डूबने का इंतजार नहीं करना होगा. उन्हें पहले से ही संभावित नुकसान का अंदाजा लगाना होगा. उसी हिसाब से एडवांस में अपनी पूंजी का एक हिस्सा अलग सुरक्षित रखना होगा. इस कवायद का सीधा सा मतलब यह है कि भविष्य में होने वाली फाइनेंशियल रिस्क की पहचान समय से पहले की जा सके. इससे आने वाले किसी भी बड़े नुकसान के लिए बैंक हमेशा तैयार रहें. बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इससे बैंकिंग सिस्टम की सेहत में सुधार होगा. लेकिन इसके लिए बैंकों को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मोटी रकम रिजर्व रखनी होगी.
कम सिबिल स्कोर वालों पर गिरेगी गाज?
नए नियमों के लागू होने के बाद आम सिबिल स्कोर पहले से ज्यादा अहम हो जाएगा. इसके तहत बैंकों को कम सिबिल स्कोर वाले लोन पर ज्यादा पैसा ब्लॉक करके रखना होगा, तो बैंक भी लोन बांटने में ज्यादा चूजी हो जाएंगे. इस हालात में कमजोर क्रेडिट हिस्ट्री वाले कस्टमर को लोन देने से पहले बैंक उनके डॉक्यूमेंट और बैकग्राउंड को बारीकी से खंगालेंगे. कम सिबिल स्कोर वाले कुछ ग्राहकों को या तो बहुत महंगी ब्याज दर पर लोन की पेशकश की जाएगी. या बैंक उनसे एक्सट्रा सिक्योरिटी के तौर पर कोई बड़ी मांग सकता है. यह इसलिए गंभीर है क्योंकि देश में लोन लेने की इच्छा रखने वाले आवेदकों का बड़ा हिस्सा इसी दायरे में आता है.
मजबूत सिबिल स्कोर वालों की मौज
बैंक जैसे-जैसे अपने फाइनेंशियल रिस्क को कम करने और उसे बेहतर तरीके से मैनेज करने की कोशिश करेंगे, वैसे-वैसे बाजार में हायर क्रेडिट स्कोर वाले कस्टमर बैंकों की पसंद बन जाएंगे. जिन ग्राहकों का सिबिल स्कोर 730 या इससे ज्यादा होता है, उन्हें बैंकिंग सेक्टर में अनुशासित माना जाता है. उनके द्वारा लोन डिफॉल्ट करने या ईएमआई बाउंस की आशंका न के बराबर होती है. ऐसे रिकॉर्ड वाले कस्टमर्स को बैंक बेहद आसान शर्तों पर और तुरंत लोन का अप्रूवल देंगे. ऐसे ग्राहकों को कम ब्याज दर का भी फायदा मिल सकता है.
इस आधार पर देखा जाएगा रिस्क
ईसीएल (ECL) फ्रेमवर्क के तहत बैंक केवल इस बात पर भरोसा करके चुप नहीं बैठेगा कि कस्टमर अपनी मौजूदा ईएमआई समय पर दे रहा है या नहीं. अब बैंक किसी को भी लोन देने से पहले उसकी पूरी फाइनेंशियल कंडीशन का रिव्यू करेंगे. इसके तहत पुराना रीपेमेंट रिकॉर्ड, क्रेडिट स्कोर में आया उतार-चढ़ाव, उसकी नौकरी और आमदनी, उस पर कुल कर्ज का बोझ, उसके एम्पलॉयमेंट की स्थिति और लोन के बदले रखी जाने वाली संपत्ति की रियल वैल्यू जैसे तमाम चीजों की जांच की जाएगी.
A. ईसीएल (ECL) फ्रेमवर्क भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से लाया जा रहा नया नियम है, यह 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. इसके तहत बैंकों को किसी लोन के डिफॉल्ट होने का इंतजार नहीं करना होगा. इसमें संभावित नुकसान का अंदाजा लगाकर पहले से ही अपनी कैपिटल का एक हिस्सा सुरक्षित रखना होगा.
नया नियम आने के बाद 730 से नीचे के सिबिल स्कोर वालों पर क्या असर पड़ेगा?
A. जिन लोगों का सिबिल स्कोर 730 से कम है, उनके लिए नया घर, कार या एजुकेशन लोन लेना मुश्किल होगा. बैंक ऐसे ग्राहकों के डॉक्यूमेंट्स और बैकग्राउंड की बहुत बारीकी से जांच करेंगे.
Q. मौजूदा लोन सिस्टम और ईसीएल में अंतर है?
A. मौजूदा सिस्टम में बैंक किसी बैड लोन के लिए पैसा अलग रखना तब शुरू करते हैं, जब लोन लेने वाला लंबे समय तक ईएमआई नहीं दे पाता और अकाउंट एनपीए हो जाता है. इसके उलट, नए ईसीएल सिस्टम में बैंकों को लोन डूबने से पहले ही भविष्य के वित्तीय रिस्क को भांपकर एडवांस में रकम रिजर्व रखनी होगी.
Q. 730 या इससे ऊपर सिबिल वाले ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
जिन कस्टमर का सिबिल स्कोर 730 या इससे ज्यादा है, उन्हें बैंकिंग सेक्टर में अनुशासित माना जाता है. ऐसे ग्राहकों से डिफॉल्ट का खतरा न के बराबर होता है. नए नियम के बाद बैंकों की तरफ से ऐसे ग्राहकों को पसंद किया जाएगा.













