मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. भारत ने जून 2026 में संयुक्त राज्य अमेरिका से रिकॉर्ड मात्रा में LPG का आयात किया है. इस कदम का सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश के करोड़ों घरों में रसोई गैस सिलेंडरों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून महीने में अमेरिका से एलपीजी इंपोर्ट का आंकड़ा दस लाख टन पार हो सकता है.
यह रणनीतिक बदलाव ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक मध्य-पूर्वी आपूर्ति मार्गों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं.
अमेरिका से आयात ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
शिपिंग और कमोडिटी ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जून 2026 के दौरान अमेरिका से भारत आने वाले एलपीजी जहाजों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है. भारत पारंपरिक रूप से अपनी एलपीजी जरूरतों के लिए कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों पर निर्भर रहा है. लेकिन भौगोलिक और रणनीतिक विविधीकरण की नीति के तहत, अब अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख और भरोसेमंद गैस आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है.
होर्मुज स्ट्रेट संकट और भारत की चिंता
पश्चिम एशिया में तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने या वहां व्यापारिक जहाजों पर हमले की आशंका लगातार बनी हुई है. वैश्विक तेल और एलपीजी व्यापार के लिए यह मार्ग एक ‘लाइफलाइन’ की तरह है. खाड़ी देशों से आने वाला अधिकांश एलपीजी इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर भारत पहुंचता है.
हाल ही में विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने भी इस बात पर चिंता जताई थी कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह के व्यवधान का सीधा असर भारत के आयात और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने और देश के भीतर घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत को रोकने के लिए भारत ने पहले ही अमेरिका से एलपीजी का रिकॉर्ड स्टॉक मंगाना शुरू कर दिया है.
क्या होगा असर?
इस रिकॉर्ड आयात का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उथल-पुथल के बावजूद भारत में एलपीजी और रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी रहेगी. सरकार के इस कदम से न केवल सप्लाई चेन सुरक्षित हुई है, बल्कि घरेलू बाजार में गैस की कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद मिलेगी.














