अगर आप या आपके आसपास कोई पान मसाला खाता है, तो आने वाले समय में आपको पान मसाला के पैकेट्स में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर कड़े नए नियम लागू किए हैं. इसके तहत अब पान मसाला की प्लास्टिक पैकिंग और कुछ खास सिंथेटिक पदार्थों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.
FSSAI का नया नियम क्या है?
FSSAI ने 7 अगस्त 2026 को खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) नियम, 2018 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है. ये नियम ऑफिशियल गजट में प्रकाशित होते ही लागू हो जाएंगे. नए नियमों के अनुसार जो पान मसाला अभी प्लास्टिक के छोटे पाउच या पुड़ियों में बिकता है, उस पर अब रोक रहेगी. अब कंपनियों को कागज (Paper), गत्ता (Cardboard), सेलुलोज या प्राकृतिक स्रोतों से बनी सामग्री का ही इस्तेमाल करना होगा. इन इको-फ्रेंडली पैक्स में किसी भी तरह का प्लास्टिक या प्रतिबंधित सिंथेटिक पदार्थ नहीं होना चाहिए.
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इन चीजों के इस्तेमाल पर भी लगा बैन
FSSAI ने केवल सामान्य प्लास्टिक पर ही बैन नहीं लगाया है, बल्कि कई अन्य पैकेजिंग मटेरियल्स पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी है. जैसे कि पॉलीथिन (Polyethylene) और पॉलीप्रोपाइलीन (Polypropylene), पॉलिएस्टर, पीवीसी (PVC), सिंथेटिक पॉलीमर और को-पॉलीमर पर भी रोक लगा दी गई है. इसके अलावा परतदार सामग्री (Laminated Material) और एल्युमिनियम फॉइल और मेटलराइज्ड लेयर्स (Metallised Layers) पर भी पाबंदी है.
कंपनियों के पास अब क्या विकल्प हैं?
प्लास्टिक पाउच बंद होने के बाद FSSAI ने कंपनियों को सुरक्षित विकल्प भी दिए हैं:
टिन के डिब्बे (Tin Containers): कंपनियां अब पान मसाला पैकिंग के लिए टिन के डिब्बों का उपयोग कर सकती हैं.
कंपनियों और कीमतों पर क्या पड़ेगा असर?
प्लास्टिक के छोटे पाउच काफी सस्ते होते थे. अब टिन, ग्लास या स्पेशल पेपर पैकेजिंग अपनाने से कंपनियों की लागत (Packaging Cost) बढ़ जाएगी. टिन और कांच के डिब्बे प्लास्टिक पाउच की तुलना में भारी और ज्यादा जगह घेरने वाले होते हैं. इससे सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजने का किराया और स्टोरेज खर्च भी बढ़ेगा. पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ने का सीधा असर आने वाले समय में पान मसाला के एमआरपी (MRP) पर भी दिख सकता है.
दरअसल, FSSAI का यह फैसला पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे को कम करने और खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. हालांकि, इसके चलते पान मसाला कंपनियों को अपनी पूरी सप्लाई चेन में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे.













