दरअसल साय सरकार ने सभी विवाहों का पंजीयन अब अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में राजपत्र में भी अधिसूचना जारी कर दी गई है।
विधि एवं विधायी कार्य विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि जिन दंपतियों का विवाह 29 जनवरी 2016 के बाद हुआ है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा के भीतर विवाह पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा तय नियमों और दस्तावेजों का पालन करना होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार विवाह पंजीयन को अनिवार्य किए जाने से फर्जी विवाह, बाल विवाह और अन्य सामाजिक कुप्रथाओं पर भी प्रभावी अंकुश लग सकेगा। साथ ही महिलाओं के कानूनी अधिकारों को मजबूती मिलेगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य विवाह से संबंधित रिकॉर्ड को विधिसम्मत और प्रमाणिक बनाना है, ताकि भविष्य में संपत्ति, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में कानूनी जटिलताओं को रोका जा सके। पंजीकृत विवाह होने से पति-पत्नी दोनों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

उत्तराखंड में है इसी तरह का आदेश
उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद से ही विवाह रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अनिवार्य हो गई है। यूसीसी नियमावली के तहत 27 जनवरी 2025 के बाद जो भी विवाह होगा, उस विवाह का रजिस्ट्रेशन विवाह की तिथि से अगले 60 दिन के भीतर करना अनिवार्य होगा। अगर कोई 60 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं करता है, तो फिर उसे रजिस्ट्रेशन के लिए अतिरिक्त लेट शुल्क यानि फाइन जमा करना होगा, जिसके बाद विवाह का रजिस्ट्रेशन होगा। साथ ही विवाह पंजीकरण को लेकर प्रावधान किया गया है कि 26 मार्च 2010, से संहिता लागू होने की तारीख यानी 27 जनवरी 2025 के बीच हुए विवाह का रजिस्ट्रेशन अगले छह महीने के भीतर करवाना होगा। 27 जनवरी 2025 के बाद शादी हुई है तो ऐसे जोड़ों को दोनों तरफ के शादी कार्ड भी दस्तावेजों में अपलोड करने होंगे। हालांकि 27 जनवरी से पहले जिनका विवाह हुआ है उनके लिए यह वैकल्पिक है। लोग खुद भी सरकार की वेबसाइट
https//ucc.uk.gov.in पर आवेदन कर दस्तावेजों और गवाहों के बयान अपलोड कर सकते हैं। इसके लिए दंपति का आधार कार्ड हाईस्कूल प्रमाण पत्र, शादी का कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो दंपति के ज्वाइंट फोटो, स्थाई निवासी, पैन कार्ड और गवाहों की जरूरत होगी















