बिहार के मोतिहारी स्थित विराट रामायण मंदिर में आज दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित होगा। इस शिवलिंग का वजन 210 टन है और ऊंचाई व गोलाई 33 फीट है। स्थापना कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार भी शामिल होंगे। इतने भारी शिवलिंग को उठाने के लिए 2 क्रेन भी मंगाई गई हैं, इन क्रेनों की क्षमता 700 एवं 500 टन है। इन क्रेनों को बंगाल और भोपाल से मंगाया गया है।
क्या हैं स्थान की खासियत
विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए पूर्वी चंपारण के कैथवलिया को ही क्यों चुना गया? इस बारे में एक श्रद्धालु साधु ने बताया कि भगवान राम की शादी जनकपुर से होकर लौटने के दौरान एक रात्रि यही ठहराव हुआ था। इसके बाद गांव का नाम बहुआरा पड़ा(यानी राम की बहू के ठहराव होने को लेकर बहुआरा गांव बना)। इसका प्रमाण रामजनकी पथ निर्माणाधीन है। वहीं विराट रामायण मंदिर के चौहद्दी में पूरब दिशा में बहुआरा गांव है।
शिवलिंग की खासियत जानें
शिवलिंग की ऊंचाई व गोलाई 33 फीट है। वजन 210 टन है। लक्ष्य 150 एकड़ की जगह है, 120 एकड़ में फैले मंदिर परिसर में कुल 22 मंदिर व 12 शिखर होंगे। मंदिर की लंबाई 1080 व चौड़ाई 540 वर्गफीट होगी। सबसे ऊंचे शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी। इसके बाद एक शिखर 190, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, पांच शिखर की ऊंचाई 108 फीट होगी। परिसर की भव्यता देखने के लिए अभी से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
विराट रामायण मंदिर की एक और विशेषता है। ये मंदिर प्रभु श्रीराम के नगर अयोध्या व माता सीता की जन्मभूमि नेपाल के धाम जनकपुर के बीच मोतिहारी के कैथवलिया के भूखंड पर तैयार हो रहा है। इसका नामकरण जानकी नगर के रूप में किया गया है। रामजनकी पथ निर्माण रास्ते से अयोध्या से इस मंदिर की दूरी 315 किलोमीटर है।















