अगर आप नौकरी करते हैं और हर साल अपनी बची हुई छुट्टियों को यूं ही जाने देते हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। नए लेबर कोड के तहत सरकार ने ऐसे नियम लाने की तैयारी की है, जिससे आपकी बची हुई छुट्टियां अब सीधे पैसे में बदल सकती हैं। हालांकि, ये नियम अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं, लेकिन जब होंगे, तो लाखों कर्मचारियों के लिए ये बड़ा फायदा साबित होगा।
क्या है नया बदलाव?
नए लेबर कानून, खासकर ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड, 2020 के तहत छुट्टियों को लेकर एक समान नियम बनाने की कोशिश की गई है। इसका मकसद है कि पूरे देश में अलग-अलग राज्यों के नियमों की जगह एक ही सिस्टम लागू हो।
अब छुट्टी के बदले पैसा
नए नियमों के मुताबिक:
हर 20 दिन काम करने पर 1 दिन की अर्न्ड लीव (EL) मिलेगी
अधिकतम 30 दिन की छुट्टी अगले साल कैरी फॉरवर्ड की जा सकती है
अगर छुट्टियां 30 दिन से ज्यादा हो जाती हैं, तो उन्हें एनकैश (कैश में बदलना) किया जा सकता है
डेलॉयट इंडिया के डायरेक्टर तरुण गर्ग के अनुसार, “जहां जमा छुट्टियां 30 दिन से अधिक हो जाती हैं, वहां कर्मचारी ऐसी अतिरिक्त छुट्टियों को भुनाने (Encash) के हकदार होंगे। कर्मचारी कैलेंडर वर्ष के अंत में अपनी सभी संचित छुट्टियों को एनकैश करने की मांग भी कर सकते हैं।”
छुट्टी के बदले मिलेगा पैसा
सबसे बड़ा बदलाव यही है कि अब कर्मचारी अपनी बची हुई छुट्टियों को साल के अंत में कैश में बदल सकते हैं। अगर आपके पास 30 दिन से ज्यादा छुट्टी बचती है, तो आप उसे एनकैश करने की मांग कर सकते हैं।
JSA एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स की पार्टनर मीनू द्विवेदी के मुताबिक, “OSH कोड के तहत, वर्कर द्वारा मांगी गई लेकिन एम्प्लॉयर द्वारा न दी गई अर्न लीव को बिना किसी लिमिट के आगे ले जाया जा सकता है। 30 दिन से ऊपर की ऐसी छुट्टियों को वर्कर साल के अंत में डिमांड करके एनकैश करा सकते हैं।”
किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा?
यह सुविधा मुख्य रूप से “वर्कर” कैटेगरी में आने वाले लोगों को मिलेगी। ALMT लीगल के एसोसिएट पार्टनर एहतेशाम अहमद ए. थावर का कहना है कि ये फायदे मुख्य रूप से ‘वर्कर’ की श्रेणी में आने वाले लोगों पर लागू होंगे। इसमें कॉन्ट्रैक्ट वर्कर और फिक्स्ड-टर्म वर्कर भी शामिल हैं। हालांकि, यह उन लोगों पर लागू नहीं होगा जो मुख्य रूप से मैनेजरियल या एडमिनिस्ट्रेटिव रोल में हैं या सुपरवाइजर के रूप में ₹18,000 प्रति माह से अधिक वेतन ले रहे हैं।
छुट्टी रिजेक्ट हुई तो भी फायदा
एक और बड़ा कर्मचारी-हितैषी बदलाव यह है कि अगर कंपनी छुट्टी देने से मना कर देती है, तो वह छुट्टी बिना किसी लिमिट के आगे कैरी फॉरवर्ड हो सकती है। मीनू द्विवेदी कहती हैं, “अगर कर्मचारी की लीव मंजूर नहीं होती, तो वह बिना किसी सीमा के आगे बढ़ सकती है और 30 दिन से ज्यादा होने पर उसे एनकैश किया जा सकता है।” यह नियम कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने में मदद करेगा।
पहले क्या था, अब क्या बदला?
पहले छुट्टियों के नियम हर राज्य के हिसाब से अलग-अलग होते थे। शॉप्स एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट और फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 के तहत अलग-अलग राज्यों में छुट्टी जमा करने और एनकैशमेंट के नियम भी अलग थे।
जोटवानी एसोसिएट्स के पार्टनर दिनकर शर्मा कहते हैं, “कुछ राज्यों में 45-60 दिन तक छुट्टियां जमा करने की अनुमति थी, जबकि कुछ जगहों पर नियम अलग थे।” अब नए लेबर कोड के तहत एक राष्ट्रीय स्तर का सिस्टम लागू होगा, जिससे नियम आसान और स्पष्ट बनेंगे।
अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए नियम
फिलहाल, ये नए लेबर कोड पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। इसकी वजह यह है कि कई राज्यों ने अभी तक अपने-अपने नियमों को अंतिम रूप नहीं दिया है। जब सभी राज्य अपने नियम तय कर लेंगे, तभी यह व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी।
कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव
नया लेबर कोड कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और फायदेमंद बदलाव लेकर आ सकता है। यह न सिर्फ छुट्टियों को लेकर स्पष्टता देगा, बल्कि उन्हें एक आर्थिक लाभ में भी बदल सकता है। हालांकि, अभी इसके पूरी तरह लागू होने का इंतजार है, लेकिन आने वाले समय में यह नियम कामकाजी लोगों की जिंदगी को काफी आसान बना सकता है।















