बलौदाबाजार जिले के बाघमारा क्षेत्र में देश की चौथी बड़ी गोल्ड माइंस बनने की तैयारी तेज हो गई है। भारत में सोने के आयात पर बढ़ती निर्भरता और वैश्विक हालात के बीच यह परियोजना काफी अहम मानी जा रही है। शुरुआती सर्वे रिपोर्ट में यहां करीब 2700 किलो सोने के भंडार की पुष्टि हुई है।
बाघमारा गोल्ड माइंस प्रोजेक्ट को देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार अगले दो वर्षों में यहां सोना खनन शुरू हो सकता है। फिलहाल वेदांता ग्रुप यहां डीप ड्रिलिंग और एक्सप्लोरेशन का काम कर रहा है।
500 मीटर तक हो रही ड्रिलिंग
बाघमारा गोल्ड माइंस क्षेत्र में करीब 500 मीटर गहराई तक ड्रिलिंग की जा रही है। विशेषज्ञों की टीम अलग-अलग स्थानों पर 50 से ज्यादा ड्रिलिंग होल्स से सैंपल निकाल रही है। इन पत्थरों को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सोना कितनी मात्रा में और कितनी गहराई तक फैला हुआ है।
ड्रिलिंग के दौरान निकले सिलेंडर आकार के पत्थरों में सोने के कण साफ दिखाई दे रहे हैं। यह पूरा क्षेत्र करीब 603 हेक्टेयर में फैला हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्लोरेशन पूरा होने के बाद यहां बड़े स्तर पर खनन शुरू किया जाएगा। बाघमारा गोल्ड माइंस को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्सुकता बढ़ी है।
10 साल बाद प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार
जानकारी के मुताबिक इस परियोजना के लिए वेदांता ग्रुप को वर्ष 2015 में लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया था। हालांकि फॉरेस्ट क्लियरेंस और एनजीटी में दायर याचिकाओं के कारण प्रोजेक्ट लंबे समय तक अटका रहा। करीब 10 साल बाद अब इस प्रोजेक्ट को गति मिली है।
अधिकारियों के अनुसार सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद एक्सप्लोरेशन का काम तेजी से चल रहा है। अनुमान है कि इस खदान से निकले सोने से सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व मिलेगा। बाघमारा गोल्ड माइंस को छत्तीसगढ़ के लिए भी बड़ी औद्योगिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे रोजगार और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत में सोने की मांग और आयात की चुनौती
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन बेहद कम है। मौजूदा गोल्ड माइंस से देश में सिर्फ 1 से 1.5 टन सोना ही निकल पाता है।
यही वजह है कि भारत को अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से ज्यादा सोना आयात करना पड़ता है। सोने का आयात डॉलर में होने से विदेशी मुद्रा भंडार और रुपए पर भी दबाव बढ़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि बाघमारा गोल्ड माइंस जैसे प्रोजेक्ट सफल होते हैं तो इससे देश की आयात निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।
देश की चौथी बड़ी गोल्ड माइंस बनने की तैयारी
भारत में फिलहाल कर्नाटक की हट्टी गोल्ड माइंस और ऐतिहासिक कोलार गोल्ड फील्ड्स जैसे सीमित बड़े प्रोजेक्ट ही चर्चा में रहे हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ की बाघमारा गोल्ड माइंस को भविष्य की बड़ी संभावना माना जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना राज्य की पहचान को नई दिशा दे सकती है। लंबे समय से जिस क्षेत्र में सिर्फ जंगल और पहाड़ दिखाई देते थे, वहां अब देश के बड़े खनन प्रोजेक्ट की तैयारी हो रही है। फिलहाल सभी की नजर एक्सप्लोरेशन रिपोर्ट और आने वाले खनन कार्य पर टिकी हुई है













