भारत के छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) और ग्रामीण इलाकों में आने वाले दिनों में एटीएम सेवाएं ठप हो सकती हैं. एटीएम संचालन करने वाली कंपनियों के प्रमुख संगठन ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री’ (CATMi) ने भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ (IBA) को पत्र लिखकर इस संकट के प्रति आगाह किया है.
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कैश की भारी किल्लत और लगातार बढ़ते घाटे को देखते हुए एटीएम ऑपरेटर्स ने बैंकों को इस समस्या को सुलझाने के लिए 20 जून 2026 तक का समय दिया है. उनका कहना है कि, यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो छोटे कस्बों में एटीएम सेवाएं बंद की जा सकती हैं.
क्यों पैदा हुआ एटीएम संकट?
एटीएम ऑपरेटर्स का कहना है कि उन्हें बैंकों से उनकी मांग के मुकाबले बेहद कम नकदी मिल रही है.
कैश की भारी कमी:मार्च और अप्रैल 2026 के लिए ऑपरेटर्स ने हर महीने ₹94,000 करोड़ के कैश की मांग की थी. इसके विपरीत, मार्च में केवल 64% और अप्रैल में महज 57% कैश ही उपलब्ध कराया गया.
बड़े शहरों को प्राथमिकता: ऑपरेटर्स का आरोप है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसे बड़े सरकारी बैंक अपने पास मौजूद कैश का बड़ा हिस्सा दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों के एटीएम में भेज रहे हैं, जिससे छोटे शहरों की मशीनें खाली पड़ी हैं.
बढ़ती लागत और यूपीआई का असर: देश में डिजिटल भुगतान (UPI) बढ़ने से एटीएम से पैसे निकालने वाले लोगों की संख्या में 10% की गिरावट आई है. दूसरी ओर, सुरक्षा और ईंधन महंगे होने से एटीएम चलाने का खर्च काफी बढ़ गया है, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है.
आरबीआई का रुख
एटीएम ऑपरेटर्स ने इस घाटे की भरपाई के लिए बैंकिंग इंडस्ट्री से ₹100 करोड़ के मुआवजे की मांग की है. दूसरी तरफ, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का कहना है कि देश में नकदी की कोई कमी नहीं है. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, वर्तमान में बाजार में रिकॉर्ड ₹42.56 लाख करोड़ की नकदी सर्कुलेशन में मौजूद है. आरबीआई ने आश्वासन दिया है कि जहां भी कैश की कमी है, वहां जल्द ही आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी.
यदि बैंकों और एटीएम कंपनियों के बीच यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो छोटे शहरों के आम नागरिकों को पैसों की निकासी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.













