केंद्र सरकार ने देश के एग्जाम सिस्टम में सुधार के लिए एक हाई पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टास्क फोर्स की अगुवाई मशहूर टेक्नीकल स्पेशलिस्ट नंदन नीलेकणी करेंगे। सरकार का कहना है कि इसका मकसद परीक्षा सिस्टम को अधिक ट्रांसपेरेंट, भरोसेमंद और टेक्नीकल बेस्ड बनाना है।
इन विशेषज्ञों को मिली जिम्मेदारी
इस टास्क फोर्स में पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा को भी शामिल किया गयाहै।
पीएम मोदी ने क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया, वे आज जेल में हैं।” पीएम मोदी ने बताया कि सरकार पहले ही फास्ट-ट्रैक कोर्ट बना चुकी है और अब संसद में ऐसा नया कानून लाने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान होंगे।
तकनीक आधारित होगी परीक्षा व्यवस्था
प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह भरोसेमंद और पारदर्शी बनाना जरूरी है। इसके लिए तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नंदन नीलेकणी के नेतृत्व वाली यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद फैसला
सरकार की यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। हीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर चल रहा अपना छात्र आंदोलन भी वापस ले












