छत्तीसगढ़ में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करने की अनिवार्यता के बाद करीब 28 हजार शिक्षकों को प्रमोशन नहीं मिल सकेगा। छह महीने पहले हुई TET परीक्षा में 32 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। जिसमें से करीब साढ़े चार हजार शिक्षक की टेट परीक्षा पास कर सके हैं। ये वे टीचर्स हैं, जिनकी पोस्टिंग को अभी 8-10 साल ही हुए हैं।
यहां बता दें, प्रदेश में शिक्षकों के प्रमोशन की तारीख को 15 अगस्त से बढ़ाकर 30 अगस्त कर दिया गया है।
विभागीय बैठक ने बढ़ाई शिक्षकों की चिंता
टेट परीक्षा में 20-25 साल के स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक भी शामिल हुए थे। इनमें से अधिकतर शिक्षक TET परीक्षा में कामयाब नहीं हो सके हैं। ऐसे में अब इन 28 हजार से ज्यादा शिक्षकों का प्रमोशन तो अटक ही गया है।
उधर, सोमवार, 10 अगस्त को हुई स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक ने शिक्षकों की चिंता और बढ़ा दी है। जिसमें फैसला लिया गया कि TET पास किए बिना किसी भी शिक्षक को प्रमोशन नहीं दिया जाएगा।
TET को लेकर शिक्षक संगठन नाराज
virendra dube
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षि संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे।
प्रदेश के शिक्षक संगठन TET के ऑप्शन में विभागीय स्तर पर परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं। मांग नहीं मांगे जाने पर अब शिक्षक संगठन लामबंद की तैयारी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षि संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि बरसों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के लिए TET जैसी प्रतियोगी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता गलत है। इनके लिए विभागीय परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। यह खास तौर से 20-25 साल से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को मुश्किल में डालना है।
TET की आड़ में प्रमोशन रोकने का प्रयास
छग विद्यालय शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय तिवारी ने कहा कि शिक्षा विभाग ने केवल प्रायमरी और मिडिल के शिक्षकों के प्रमोशन के लिए टेट अनिवार्य किया है। यह पूरी तरह से गलत है। इसे सभी श्रेणी के शिक्षकों पर लागू करना चाहिए।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि यह शिक्षकों की प्रमोशन रोकने का प्रयास है। एकाएक टेट की अनिवार्यता लागू करने से शिक्षक कभी पात्र नहीं हो सकेंगे। इसलिए हम विभागीय परीक्षा की मांग कर रहे हैं।














