Raigarh News : रायगढ़:- कांग्रेस के 28 सितंबर के विरोध मार्च को लेकर रायगढ़ भाजपा के प्रमुख नेता की प्रतिक्रिया पर जिला कांग्रेस के महामंत्री आशीष शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि वोट चोरी के गंभीर सवाल का जवाब देने के बजाय उसे ‘जुमला’ बताना उस पुरानी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सवाल कठिन हो तो सवाल पूछने वाले पर ही सवाल खड़ा कर दिया जाता है।

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देश की जनता संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग से सवाल पूछ रही और जवाब देकर चुनाव आयोग पर सफाई भाजपा नेता दे रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि निर्वाचन प्रक्रिया में जो अनियमितता सामने आ रही है उसमें भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत जिम्मेदार हो सकती है।
रायगढ़ भाजपा के प्रमुख नेता लोकतंत्र और जनादेश की दुहाई दे रहे हैं। कांग्रेस भी मानती है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है, लेकिन सवाल यह है कि जिस लोकतंत्र की दुहाई दी जा रही है, उसकी चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा? केवल यह कह देने से कि ‘जनता ने हमें चुना है’, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल खत्म नहीं हो जाते।
भाजपा नेता कह रहे हैं कि कांग्रेस का भरोसा जनता के बीच कम हुआ है। यदि ऐसा है तो इसका फैसला भी जनता ही करेगी। लेकिन जनता के फैसले का हवाला देकर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवालों से बचना दो अलग-अलग बातों को एक ही तराजू में तौलने जैसा है।
कांग्रेस का सवाल बेहद सीधा है—मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े जिन सवालों पर आपत्तियां उठाई जा रही हैं, उनकी निष्पक्ष जांच में भाजपा को आखिर परेशानी क्या है? अगर सब कुछ नियमानुसार और पारदर्शी है तो जांच से स्थिति और स्पष्ट हो जानी चाहिए।
भाजपा के प्रमुख नेता कांग्रेस से उसके शासनकाल का हिसाब मांग रहे हैं। कांग्रेस जनता के सामने अपना हिसाब देने के लिए तैयार है, लेकिन भाजपा नेताओं को यह समझना चाहिए कि एक सवाल का जवाब दूसरे सवाल से नहीं दिया जाता। चुनावी प्रक्रिया पर सवाल पूछा जाए और जवाब में सड़क, नाली, विकास और पुराने शासन की कहानी सुनाई जाए, तो इसे जवाब नहीं, विषय बदलने और देश की जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश ही कहा जाएगा।
रायगढ़ में विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले भाजपा नेताओं को यह भी बताना चाहिए कि विकास का विज्ञापन और लोकतांत्रिक पारदर्शिता दो अलग विषय हैं। सड़क बनाना सरकार का काम है और चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी।
कांग्रेस को ‘भ्रम की राजनीति’ का आरोप देने वाले भाजपा नेताओं से कांग्रेस पूछना चाहती है—अगर कांग्रेस भ्रम फैला रही है तो वास्तविक तथ्य सामने रखिए, दस्तावेज सामने रखिए, जांच कराइए और दूध का दूध, पानी का पानी कर दीजिए। लेकिन सवाल उठते ही उसे ‘जुमला’ कह देना कहीं न कहीं जवाब से बचने की राजनीति और सवालों पर पर्दा डालने की कोशिश को ही उजागर करता है।
भाजपा के प्रमुख नेता कह रहे हैं कि जनता नारे नहीं, काम देख रही है। कांग्रेस भी यही कह रही है—जनता केवल उद्घाटन के पत्थर नहीं देखती, वह यह भी देखती है कि उसके मौलिक,लोकतांत्रिक अधिकार कितने सुरक्षित हैं।
और जहां तक जनादेश के सम्मान की बात है, कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि जनादेश का सम्मान तभी मजबूत होता है जब मतदाता के वोट पर भी उतना ही भरोसा हो जितना सत्ता के दावे पर।
इसलिए भाजपा नेताओं से कांग्रेस की सीधी अपील है—
कांग्रेस के विरोध मार्च से परेशान होने की जरूरत नहीं है, देश में उठ रहे सवालों का जवाब दीजिए।
‘वोट चोरी’ को जुमला कहने के बजाय वास्तविक तथ्यों से खारिज कीजिए।
आरोप गलत हैं तो जांच का स्वागत कीजिए।
और अगर सब कुछ पारदर्शी है तो पारदर्शिता साबित करने में इतनी बेचैनी क्यों?

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लोकतंत्र में जनता को उपदेश नहीं, स्पष्ट जवाब चाहिए। कांग्रेस सवाल पूछती रहेगी और जनता के सामने लोकतांत्रिक अधिकारों तथा चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे मजबूती से उठाती रहेगी।
आशीष शर्मा महामंत्री जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़













