Diamond Price हीरे खरीदने वालों के लिए मौका है. कच्चे और थोक बाजार में नेचुरल डायमंड की कीमतें दो दशक से ज्यादा समय के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. 2021 के मुकाबले थोक नेचुरल डायमंड करीब 30 से 40 फीसदी तक सस्ते बताए जा रहे हैं. ऐसे में सवा यूल उठता है कि अगर हीरा इतना सस्ता हो गया है, तो बाजार में मिलने वाली डायमंड अंगूठी या हार की कीमत में उतनी बड़ी गिरावट क्यों नहीं दिख रह
इसका सीधा जवाब है कि ज्वेलरी की कीमत सिर्फ हीरे से तय नहीं होती. जब आप डायमंड रिंग या हार खरीदते हैं, तो उसमें हीरे के अलावा सोना या प्लैटिनम भी लगा होता है. इसके साथ ज्वेलरी बनाने की मजदूरी, डिजाइन का खर्च और दूसरे चार्ज भी जुड़ते हैं. यानी हीरा सस्ता होने के बाद भी अगर सोना महंगा है, तो पूरी अंगूठी की कीमत बहुत ज्यादा नीचे नहीं आएगी.
भारत में इसका असर और साफ दिखाई देता है, क्योंकि यहां सोने के भाव काफी ऊंचे बने हुए हैं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक-अगस्त के अंत में घरेलू सोने की कीमत 1,58,854 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी. सितंबर में कुछ गिरावट जरूर आई, लेकिन सोना अभी भी महंगा है. ऐसे में अंगूठी में इस्तेमाल होने वाले सोने की कीमत हीरे के सस्ते होने का फायदा कुछ हद तक कम कर देती है.
मान लीजिए किसी अंगूठी में हीरे की कीमत पहले 50 हजार रुपये थी और अब वह काफी कम हो गई. लेकिन उसी अंगूठी में लगा सोना महंगा हो गया तो दुकानदार की पूरी लागत उतनी नहीं घटेगी. ऊपर से डिजाइन बनाने और ज्वेलरी तैयार करने का खर्च भी रहेगा. इसलिए दुकान पर आपको हीरा सस्ता होने का पूरा फायदा सीधे बिल में दिखाई नहीं देगा. आसान भाषा में कहें तो हीरा सस्ता हुआ है, लेकिन पूरी ज्वेलरी सिर्फ हीरे से नह
एक और जरूरी बात यह है कि हर हीरे की कीमत एक जैसी नहीं गिरी है. बाजार में छोटे और कम गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरों पर लैब-ग्रोउन डायमंड का ज्यादा दबाव है. वहीं बड़े और अच्छी क्वालिटी वाले दुर्लभ हीरों की मांग कुछ हद तक बनी हुई है. इसलिए अगर आप छोटी या सामान्य क्वालिटी का हीरा खरीद रहे हैं, तो उसमें ज्यादा कीमत गिरावट दिख सकती है. महंगे और दुर्लभ हीरों का मामला अलग हो सकता है.
लैब वाले हीरों ने बदला गेम
लैब में बनाए जाने वाले हीरों ने भी पूरा बाजार बदल दिया है. ये हीरे देखने और रासायनिक संरचना के मामले में प्राकृतिक हीरों जैसे होते हैं, लेकिन इन्हें जमीन से निकालने की जरूरत नहीं पड़ती. इनका उत्पादन बढ़ने से कीमतों पर दबाव आया है. खासकर छोटे हीरों में इसका असर ज्यादा दिखाई देता है. ग्राहक के पास अब प्राकृतिक हीरे के साथ लैब-ग्रोउन डायमंड का विकल्प भी है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है.
भारत के लिए हीरे के बाजार में यह बदलाव काफी अहम है. दुनिया के करीब 90 फीसदी कच्चे हीरे भारत में काटे और पॉलिश किए जाते हैं. लेकिन कमजोर वैश्विक मांग और बाजार में जमा पुराने स्टॉक के कारण भारत के कट और पॉलिश किए हुए हीरों के निर्यात पर भी असर पड़ा है. वित्त वर्ष 2026 में इनका निर्यात 8.52 फीसदी घटकर करीब 12.16 अरब डॉलर रह गया. यानी कारोबार पर दबाव साफ दिख रहा है.
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तो अगर आप डायमंड की अंगूठी या हार खरीदने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ यह देखकर फैसला न करें कि हीरा सस्ता हो गया है. दुकानदार से हीरे की कीमत, सोने का वजन, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क अलग-अलग पूछें. तभी पता चलेगा कि आपको असल में कितनी बचत हो रही है. सीधी बात यह है कि हीरा सस्ता जरूर हुआ है, लेकिन सोना और बाकी खर्च महंगे होने की वजह से पूरी डायमंड ज्वेलरी उसी अनुपात में सस्ती होना जरूरी नहीं है.
कच्चे और थोक बाजार में हीरे कितने सस्ते हो गए हैं?
Diamond Priceप्राकृतिक हीरों की थोक कीमतें पिछले दो दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं और 2021 की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती हो गई हैं।
हीरे सस्ते होने के बावजूद डायमंड रिंग महंगी क्यों मिल रही है?
लैब-ग्रोन हीरों ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है?















