Flight Ticket Price Hike: हवाई यात्रियों जो आगामी दिवाली और छठ त्योहार की तैयारी कर रहे हैं, वे इंडिगो एयरलाइंस द्वारा हाल के भाड़े में वृद्धि के कारण बढ़ी हुई हवाई यात्रा लागत का अनुभव कर रहे हैं। 6 अक्टूबर को, एयरलाइन ने जेट ईंधन की कीमतों में वृद्धि के बाद टिकट कीमतों में वृद्धि की घोषणा की, जो सीधे परिचालन खर्चों को प्रभावित करती है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानें इन ईंधन अधिभार में वृद्धि से प्रभावित हैं, जिससे यात्रियों के लिए यात्रा लागत बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप, छुट्टियों और व्यवसाय यात्रियों दोनों को त्योहार के मौसम में अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ रहा है। इस टिकट कीमतों में वृद्धि से यात्रा योजनाओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना है, जिससे यात्रियों को अपनी यात्राओं को पुनर्विचार या विलंब करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि बढ़ी हुई लागत को समायोजित किया जा सके, जिससे इस उत्सव के दौरान वित्तीय तनाव में वृद्धि हो रही है।

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के लिए कितना बढ़ा खर्च?
जानकारी के लिए आपको बता दें कि दरअसल इंडिगो एयरलाइंस ने घरेलू उड़ानों के लिए फ्यूल सरचार्ज रेट किलोमीटर के हिसाब से बढ़ाए गए हैं, जिसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन की जरूरत पर भी पड़ेगा. घरेलू उड़ानों के लिए जेट फ्यूल सरचार्ज में 100 से 350 रुपये तक कि बढ़ोतरी कि गई है. वहीं हवाई किराए में वृद्धि भी यात्रा की दूरी के आधार पर होगी और अलग-अलग होगी. नई दरें मंगलवार यानि कल 6 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी और कम एवं लंबी दूरी के लिए यह चार्ज भिन्न -भिन्न हो सकता है. विदेशों की उड़ानों पर कितना फ्यूल सरचार्ज लगेगा, यह फ्लाइट के रूट और उसकी दूरी के अनुसार निश्चित होगा.

ATF की कीमत बढ़ीं तो हवाई सफर क्यों महंगा हो गया है?
IndiGo Airlines ने देखा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी संघर्ष वैश्विक ईंधन बाजारों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इन भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल और जेट ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है, हाल के रिपोर्टों में मासिक ईंधन लागत में 14% से अधिक की वृद्धि दिखाई गई है, जो पिछले दस वर्षों में देखी गई स्तरों से ऊपर है। चूंकि जेट ईंधन एयरलाइन संचालन खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए कीमतों में वृद्धि सीधे एयरलाइनों के वित्तीय बोझ को बढ़ाती है। परिणामस्वरूप, इन उच्च लागतों के कारण एयरलाइनों को अपने टिकट की कीमतें बढ़ाने की आवश्यकता होती है ताकि बढ़ी हुई लागतों को पूरा किया जा सके, जो यात्रियों और एयरलाइन की लाभप्रदता दोनों को प्रभावित कर सकता है।















