छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में ग्रामीण अंचलों की अंधियारी जिंदगी को रोशन करने वाली सरकारी योजना में सेंध लगाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए संचालित महत्वाकांक्षी आरडीएसएस (RDSS) योजना की हजारों किलो सरकारी विद्युत सामग्री को बाजार में खपाने की साजिश रच रहे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पांच शातिर आरोपियों को पुलिस ने धर दबोचा है। इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने करीब 29 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की है, जिसमें सरकारी केबल के साथ-साथ तस्करी में इस्तेमाल होने वाला एक बड़ा ट्रक और एक चमचमाती महिंद्रा एक्सयूवी (XUV) कार भी शामिल है।
पेटी ठेकेदार बेच रहा था खुले बाजार में
गबन के खेल की पटकथा का खुलासा तब हुआ जब 14 मई 2026 को रायपुर निवासी प्रार्थी शैलेंद्र वर्मा ने दशरंगपुर पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया था कि ग्राम कोसमंदा में बिजली विस्तार के लिए पेटी ठेकेदार तिवारी कंस्ट्रक्शन को जो कीमती केबल और कंडक्टर अलॉट किए गए थे, उन्हें वहां लगाने के बजाय कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि सोनू तिवारी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर खुले बाजार में बेचने की फिराक में था।
जब्त किया गया सरकारी सामान
शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस की तफ्तीश के आगे आरोपी ज्यादा देर टिक नहीं सके और उनके कबूलनामे के साथ ही गबन की परत दर परत खुलती चली गई। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 6 लाख रुपये कीमत का 2470 किलोग्राम वजनी सरकारी केबल और कंडक्टर बरामद कर लिया।
वाहन जब्त, पांच गिरफ्तार
पुलिस ने माल ढुलाई के लिए उपयोग किया जा रहा 15 लाख का आईशर ट्रक और रेकी व एस्कॉर्ट के लिए इस्तेमाल हो रही 8 लाख की महिंद्रा एक्सयूवी कार को सीज किया है। आरोपियों में उत्तर प्रदेश के बहराइच और श्रावस्ती जिले के सोनू तिवारी, दिनेश प्रताप शर्मा, ददन्नू तिवारी, घनश्याम आजाद तथा मध्य प्रदेश के भिंड जिले का अभिषेक बघेल शामिल हैं। इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के तमाम मोहरों को 15 जून को कबीरधाम सीजेएम कोर्ट में पेश कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।













