अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं या कमाई का कोई अच्छा मौका ढूंढ रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए बेहद खास है। देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी करीब 10,000 करोड़ रुपये का आईपीओ (IPO) आज यानी 14 जुलाई 2026 से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है।
यह देश के सबसे भरोसेमंद ब्रांड स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का हिस्सा है, इसलिए बाजार में इसे लेकर काफी हलचल है। लेकिन निवेश करने से पहले आपको इसके प्राइस बैंड, जरूरी तारीखों और मुनाफे के गणित को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। आइए जानते हैं इस आईपीओ की पूरी कुंडली।
आईपीओ कब खुलेगा: 14 जुलाई 2026 (आज)
आईपीओ कब बंद होगा: 16 जुलाई 2026
प्राइस बैंड (Price Band): 545 रुपये से लेकर 574 रुपये प्रति शेयर
लॉट साइज (Lot Size): 26 शेयर (कम से कम इतने शेयर के लिए बोली लगानी होगी)
कम से कम कितना निवेश जरूरी: ऊपरी प्राइस बैंड (574 रुपये) के हिसाब से एक लॉट के लिए आपको कम से कम 14,924 रुपये निवेश करने होंगे।
इश्यू का साइज: लगभग 10,000 करोड़ रुपये (9,813 करोड़ रुपये से 9,318 करोड़ रुपये के बीच)
लिस्टिंग कहां होगी: BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) दोनों पर।
क्या है इस आईपीओ की सबसे बड़ी बात?
आपको बता दें कि यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी आसान शब्दों में इसका ये मतलब है कि इस आईपीओ के जरिए कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं कर रही है। बल्कि कंपनी के दो मौजूदा मालिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और Amundi India Holding, अपने पास मौजूद कुछ शेयर बेच रहे हैं। आईपीओ से मिलने वाला पूरा पैसा इन शेयर बेचने वाले मालिकों के पास जाएगा, न कि सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी के खजाने में। हालांकि, आईपीओ के बाद भी SBI ही मुख्य प्रमोटर रहेगा और उसके पास बहुमत हिस्सेदारी बनी रहेगी।
Retail Investors को क्या करना चाहिए: लगाएं पैसा या रहें दूर?
SBI म्यूचुअल फंड बेशक एक बेहद मजबूत मार्केट पोजीशन, बेहतरीन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और शानदार मुनाफे वाली हाई-क्वालिटी कंपनी है। भारत में जैसे-जैसे म्यूचुअल फंड को लेकर लोगों की रुचि बढ़ रही है, इस सेक्टर का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।
लॉन्ग टर्म के लिए बेहतर:
अगर आप लंबे समय के लिए भारत की बढ़ती म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो देश की सबसे बड़ी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का यह एक बेहतरीन मौका है।
वैल्यूएशन पर रखें नजर:
आईपीओ पूरी तरह से ओएफएस (OFS) है, इसलिए कंपनी के पास बिजनेस बढ़ाने के लिए नया फंड नहीं आ रहा है। ऐसे में निवेश का फैसला सिर्फ आईपीओ की लोकप्रियता या जीएमपी (GMP) देखकर न लें। कंपनी के फंडामेंटल्स और लिस्टिंग के समय इसकी वैल्यूएशन (शेयर की कीमत वाजिब है या महंगी) को देखकर ही अपना अंतिम फैसला लें।














