बीजापुर में नया बस स्टैंड के पीछे 20 अवैध मकान अब तक ध्वस्त किए जा चुके हैं, और यह कार्रवाई लगातार जारी है। इस दौरान एक डीआरजी जवान का घर भी टूट गया, जबकि वह नाइट ड्यूटी पर था। उसके घर में मौजूद पत्नी ने बताया कि वे 2006 से यहां रह रहे हैं और उनके पास अपने गांव में कोई और घर नहीं है। इस कार्रवाई के दौरान कई महिलाओं की आँसुओं से भरी तस्वीरें भी सामने आईं, जो सवाल कर रही थीं, “हम कहां जाएंगे?”
पीड़ित गंगा माड़वी ने कहा कि वे पिछले चार सालों से अपने परिवार के साथ यहां रह रहे हैं। नक्सली हिंसा के चलते उन्हें अपने गांव छोड़कर यह स्थान अपनाना पड़ा। प्रशासन के साथ बातचीत के बाद उन्होंने यहाँ एक घर बनाया और नियमित रूप से रह रहे थे।
गंगा के मुताबिक तीन महीने पहले उन्हें मकान खाली करने का नोटिस मिला था, जिस पर मामला कोर्ट में चल रहा है। उन्हें यह भरोसा भी दिलाया गया था कि घर नहीं तोड़ा जाएगा, लेकिन अब अचानक मकानों को गिराया जा रहा है।














